Тарсам нашудаи ғӯра , ангур хазон ояд
ترسم نشده غوره، انگور خزان آید
ё май нашудаи ангури моҳ рамазон ояд
یا می نشده انگور ماه رمضان آید
Зоҳид ки кунад манъам аз рафтани майхона
زاهد که کُنَد منعم از رفتن میخانه
Бо содаи рухӣ ҳар шаби онҷо ба ниҳон ояд
با ساده رخی هر شب آنجا به نهان آید
Гар ашк равонам нест зонаст ки май тарсам
گر اشکِ روانم نیست زآن است که می ترسم
Аз дили ғам ӯ берун бо ашк равон ояд
از دل غم او بیرون با اشک روان آید
Гардун ки дили моро карда ҳадафи тираш
گردون که دل ما را کرده هدف تیرش
Ҳар тир ки андозад яксар ба нишон ояд
هر تیر که اندازد یکسر به نشان آید
Ҳар шаби бут айёрӣ гуяд ба ?бирт оем
هر شب بت عیاری گوید به بَرَت آیم
Ояд ба барам аммо ҳангом азон ояд
آید به برم اما هنگام اذان آید
Он шайхи сияҳи нома бо ҷбаҳу ъамома
آن شیخ سیه نامه با جبه و عمامه
Аз майкадаи сад бориши ронданд ва ҳамон ояд
از میکده صد بارَش، راندند و همان آید
Кардам талаб аз обиди вирдии паии дафъи ғам
کردم طلب از عابد وردی پی دفع غم
Гуфто бар соқии рӯ кин кор аз он ояд
گفتا بَرِ ساقی رو، کاین کار از آن آید
Гоҳе бинавоз эй ҷон чун ғайри сафойӣ ро
گاهی بنواز ای جان چون غیر صفایی را
Тарсам ки зи бедодати рӯзӣ ба фиғон ояд
ترسم که ز بیدادت روزی به فغان آید