Омад баҳору ғунча ба гулзор ҷо гирифт

آمد بهار و غنچه به گلزار جا گرفت

Захмӣ ки буд дар дили булбул ҳаво гирифт

زخمی که بود در دل بلبل هوا گرفت

Паҳлу занад ба нофаи машки остин ӯ

پهلو زند به نافه مشک آستین او

Бар даст ҳар ки кокули он дилрабо гирифт

بر دست هر که کاکل آن دلربا گرفت

Гуфтам рӯм ба кӯчаи зулфаш ҳаё намонад

گفتم روم به کوچه زلفش حیا نماند

Имшаби сари раҳами асас ошно гирифт

امشب سر رهم عسس آشنا گرفت

Бар чарх аз кшоиши корам гиреҳ фитод

بر چرخ از کشایش کارم گره فتاد

Ин донаи оқибати гулӯӣ Асия гирифт

این دانه عاقبت گلوی آسیا گرفت

Хори ғамӣ ки бар ҷигари мо халида буд

خار غمی که بر جگر ما خلیده بود

Аз пои мо баромадаи домон мо гирифт

از پای ما برآمده دامان ما گرفت

Моро зи сайри кӯии ту монеъ ки ме шавад

ما را ز سیر کوی تو مانع که می شود

Кӣ ме тавон Аннани насим сабо гирифт

کی می توان عنان نسیم صبا گرفت

То сар бар остона шаҳ монад сидо

تا سر بر آستانه شه ماند سیدا

Худро ба зери сояи бол ҳумо гирифт

خود را به زیر سایه بال هما گرفت