Соқӣ бидиҳ он май ки зи дил шӯр барояд

ساقی بده آن می که ز دل شور برآید

Мастонаи табассуми зи лаб ҳур барояд

مستانه تبسم ز لب حور برآید

Чандон зи паии донаи холии ту давидам

چندان ز پی دانه خالی تو دویدم

Акнӯн нафасам чун нафас мӯр барояд

اکنون نفسم چون نفس مور برآید

Оҳ аз ҷигарам дар ҳаваси он лаби ширин

آه از جگرم در هوس آن لب شیرین

Пари обила чун хӯша ангур барояд

پر آبله چون خوشه انگور برآید

Аз базми ту то давр шудам дар табу тобам

از بزم تو تا دور شدم در تب و تابم

Оташи зи китоби ман маҳҷӯр барояд

آتش ز کتاب من مهجور برآید

Хати рахт аз сина бурун кард дилам ро

خط رخت از سینه برون کرد دلم را

Дар фасли баҳорони зи замин мӯр барояд

در فصل بهاران ز زمین مور برآید

Ширини даҳанони нисбати худ бо ту расонанд

شیرین دهنان نسبت خود با تو رسانند

Сад хӯшаи зи икдонаҳ ангур барояд

صد خوشه ز یکدانه انگور برآید

Давр аз қади ту сарв шавад пои шикаста

دور از قد تو سرو شود پای شکسته

Бе рӯй ту наргиси зи чаман кӯр барояд

بی روی تو نرگس ز چمن کور برآید

Мӯе шавад ва бар лаби чинӣ наад ангушт

مویی شود و بر لب چینی نهد انگشت

Ҳар сабза ки бар турбат фағфур барояд

هر سبزه که بر تربت فغفور برآید

Ҳар дона ки бар хок фишонанд карямон

هر دانه که بر خاک فشانند کریمان

Прўозкнон дар талаб мӯр барояд

پروازکنان در طلب مور برآید

Нӯшӣ ки ҳавас мекунӣ аз суфраи золим

نوشی که هوس می کنی از سفره ظالم

Нишист ки аз хона занбӯр барояд

نیشیست که از خانه زنبور برآید

Дар орзӯии шамъи ту фонӯси хаёлам

در آرزوی شمع تو فانوس خیالم

Аз равзанаи хонаи ман нур барояд

از روزنه خانه من نور برآید

Ин он ғазал сӯфӣ дилҷӯаст ки фармуд

این آن غزل صوفی دلجوست که فرمود

Вақтаст ки коми ман махмур барояд

وقتست که کام من مخمور برآید