Чу баҳри пурсишами он шаҳсавор ме ояд

چو بهر پرسشم آن شهسوار می آید

Сафи малики зи ямин ва ясор ме ояд

صف ملک ز یمین و یسار می آید

Гуҳӣ ки аз ғам ӯ май занам ба дили нохун

گهی که از غم او می زنم به دل ناخن

Садои кӯҳкан аз кӯҳсор ме ояд

صدای کوهکن از کوهسار می آید

Барам чу номаи аъмол дар тарозугоҳ

برم چو نامه اعمال در ترازوگاه

Китобатӣ ки ба сӯем з ёр ме ояд

کتابتی که به سویم ز یار می آید

Ба боғи нўхти ман дӯш мекашид ва ҳануз

به باغ نوخط من دوش می کشید و هنوز

Насими масти сабо мшкбор ме ояд

نسیم مست صبا مشکبار می آید

зи чоки синаи равшандили худои тарсам

ز چاک سینه روشندل خدا ترسم

Пимбрист ки беруни з ғор ме ояд

پیمبریست که بیرون ز غار می آید

зи боли мурғ чаман шуд қафаси гули сад барг

ز بال مرغ چمن شد قفس گل صد برگ

Ки гуфтааст ба булбул баҳор ме ояд

که گفته است به بلبل بهار می آید

Кадоми лолаи рухи имрӯз дар чаман рафтаст

کدام لاله رخ امروز در چمن رفتست

Ба ҳар ки менагарм доғдор ме ояд

به هر که می نگرم داغدار می آید

Бар остонаи худ ҳамчуи нақш по умрӣаст

بر آستانه خود همچو نقش پا عمریست

Нишастаам ба умедӣ ки бор ме ояд

نشسته ام به امیدی که بار می آید

Каманди буии гули орад ба боғи булбул ро

کمند بوی گل آرد به باغ بلبل را

Дилам ба сӯии ту беихтиёр ме ояд

دلم به سوی تو بی اختیار می آید

Ба гирди кӯии ту ҳар рӯзи гирдбод аз дашт

به گرد کوی تو هر روز گردباد از دشت

Ба ҷустуҷӯии ман хоксор ме ояд

به جستجوی من خاکسار می آید

Агар ба кӯҳи нуҳуми пушт бар замин монад

اگر به کوه نهم پشت بر زمین ماند

Ғамӣ ки бар ман аз ин рӯзгор ме ояд

غمی که بر من از این روزگار می آید

Нигоҳи гарми ту май сӯзади устихонам ро

نگاه گرم تو می سوزد استخوانم را

Куҷои зи барқи тараҳҳум бухор ме ояд

کجا ز برق ترحم بخار می آید

Хиҷолатӣ ки кашӣ аз гуноҳи худ имрӯз

خجالتی که کشی از گناه خود امروز

Нигоҳи дор ки фардо ба кор ме ояд

نگاه دار که فردا به کار می آید

Спндўор аз он кӯии сидои имрӯз

سپندوار از آن کوی سیدا امروز

Чаҳ шуд ки сӯхта ва беқарор ме ояд

چه شد که سوخته و بی قرار می آید