Зулфи ту шоми буиу ҷабини субҳгоҳи ид
زلف تو شام بوی و جبین صبحگاه عید
Абру ҳилоли рӯзау рухсори моҳи ид
ابر و هلال روزه و رخسار ماه عید
Чашмам параст аз ту чу саҳни намозгоҳ
چشمم پر است از تو چو صحن نمازگاه
Даравии хатати сиёҳу ҷамоли ту шоҳи ид
دروی خطت سیاه و جمال تو شاه عید
Шояд ки дар канори кашам аз миёни халқ
شاید که در کنار کشم از میان خلق
То бозгаштан ту нишинам ба роҳи ид
تا بازگشتن تو نشینم به راه عید
Онҳо ки мункиранд ба имрӯзи ид ро
آنها که منکرند به امروز عید را
Бӯсу канори мо ва ту бошад гувоҳи ид
بوس و کنار ما و تو باشد گواه عید
Ғайр аз ту баҳраи манди марои дили зи шикваи пар
غیر از تو بهره مند مرا دل ز شکوه پر
Мардуми зи иди хуррам ва ман додхоҳи ид
مردم ز عید خرم و من دادخواه عید
Бар домани ту то нишинад зи раҳи ғубор
بر دامن تو تا نشیند ز ره غبار
Аз абри дида об фишонам ба роҳи ид
از ابر دیده آب فشانم به راه عید
Чандини ҳилол нав шуд ва ид омаду гузашт
چندین هلال نو شد و عید آمد و گذشت
Ҳаргиз накард соя ба фарқами кулоҳи ид
هرگز نکرد سایه به فرقم کلاه عید
эй сидои расонади хаташи номаи висол
ای سیدا رساند خطش نامه وصال
Бошад биҳишт омадани тири моҳи ид
باشد بهشت آمدن تیر ماه عید