Имшаб эй мижгони сияҳи чашмӣ ки бар рӯй ту буд
امشب ای مژگان سیه چشمی که بر روی تو بود
Дӯди оҳами морпечи тоқи абрӯии ту буд
دود آهم مارپیچ طاق ابروی تو بود
Шамъ дар фонӯс чун дил дар бар ман ме тапид
شمع در فانوس چون دل در بر من می تپید
Дар кадомин базми имшаби қади дилҷӯии ту буд
در کدامین بزم امشب قد دلجوی تو بود
Буд дар чашмами нигаҳ чун дар биёбони гирдбод
بود در چشمم نگه چون در بیابان گردباد
Ҳалқаи домии к дар дунболи оҳӯии ту буд
حلقه دامی ک در دنبال آهوی تو بود
Соғарӣ чун гул аз дасти ту рӯй тоза дошт
ساغری چون گل از دست تو روی تازه داشت
Ғунчаи минои димоғи осӯда аз буии ту буд
غنچه مینا دماغ آسوده از بوی تو بود
Онкӣ ҳамчун шамъ буд ӯро забони чарбу нарм
آنکه همچون شمع بود او را زبان چرب و نرم
Аз паии афсунгарии зону ба зонуии ту буд
از پی افسونگری زانو به زانوی تو بود
Мағзро дар устихонам чун фатила доғ кард
مغز را در استخوانم چون فتیله داغ کرد
Суҳбати қавмӣ ки гарм аз оташи хуии ту буд
صحبت قومی که گرم از آتش خوی تو بود
Моҳи шабгард аз ту эй ороми ҷонҳо пай наёфт
ماه شبگرد از تو ای آرام جانها پی نیافت
То саҳар чун сидои саргаштаи кӯии ту буд
تا سحر چون سیدا سرگشته کوی تو بود