Маро ҳар шаби таби ҳиҷрони он бдхў бисӯзанд

مرا هر شب تب هجران آن بدخو بسوزاند

Ба ҳар паҳлу ки гирдами бистарам паҳлу бисӯзанд

به هر پهلو که گردم بسترم پهلو بسوزاند

Ба рӯй сафҳаи дил ҳар фусуниро ки бинивисам

به روی صفحه دل هر فسونی را که بنویسم

Дучораш гар шавам он наргис ҷодӯ бисӯзанд

دچارش گر شوم آن نرگس جادو بسوزاند

намедонам кадомин сабзи хат дар боғ ме ояд

نمی دانم کدامین سبز خط در باغ می آید

Ки ҳар шаби боғбони гулҳои ънбрбў бисӯзанд

که هر شب باغبان گلهای عنبربو بسوزاند

Ба гардани баъд аз ин тӯмори оғӯшам ҳамоил шуд

به گردن بعد از این طومار آغوشم حمایل شد

Диламро то ба кӣ тъўизи он бозу бисӯзанд

دلم را تا به کی تعویذ آن بازو بسوزاند

Ба дасту пои маҷнӯни ман оҳан мум ме гардад

به دست و پای مجنون من آهن موم می گردد

Дилами оташи нафаси занҷирро чун мӯ бисӯзанд

دلم آتش نفس زنجیر را چون مو بسوزاند

Фалак ҳар ҷо ки дўлтхонаҳ бебунёд ме созад

فلک هر جا که دولتخانه بی بنیاد می سازد

зи иксўи об агар резии зи дигар сӯ бисӯзанд

ز یکسو آب اگر ریزی ز دیگر سو بسوزاند

Замини шӯри обу тухми деҳқонро кунад зойеъ

زمین شور آب و تخم دهقان را کند ضایع

Набинад рӯй некии захм агар дору бисӯзанд

نبیند روی نیکی زخم اگر دارو بسوزاند

Тулӯъи субҳдами дӯд аз димоғи шаби буруни орад

طلوع صبحدم دود از دماغ شب برون آرد

Чу рӯмӣ даст ёбад кишвар ҳиндӯ бисӯзанд

چو رومی دست یابد کشور هندو بسوزاند

зи нақши мақдами ваҳшии ғизолами барқ май хезад

ز نقش مقدم وحشی غزالم برق می خیزد

Биёбонро рамиданҳои ин оҳӯ бисӯзанд

بیابان را رمیدنهای این آهو بسوزاند

Надорам сидо аз содаи рӯйони оташӣ дар дил

ندارم سیدا از ساده رویان آتشی در دل

Марои ғамҳои он маъшӯқи чор абрӯ бисӯзанд

مرا غمهای آن معشوق چار ابرو بسوزاند