Бе худ шудам аз зулфи ду то ком гирифтам
بی خود شدم از زلف دو تا کام گرفتم
Дар доми ту афтодам ва ором гирифтам
در دام تو افتادم و آرام گرفتم
Мурғони чаманро ба даҳуми меҳри ниҳодам
مرغان چمن را به دهم مهر نهادم
Рафтам ба гулистон ва туро ном гирифтам
رفتم به گلستان و تو را نام گرفتم
То чашми туро сӯии чароғам назар уфтад
تا چشم تو را سوی چراغم نظر افتد
Равғани зи гули наргис ва бодом гирифтам
روغن ز گل نرگس و بادام گرفتم
Бар каъбаи рухсораи ту рӯй ниҳодам
بر کعبه رخساره تو روی نهادم
Бо қофилаи зулфи раҳ шом гирифтам
با قافله زلف ره شام گرفتم
Дар кӯй ту рафтам ба қади хам шудаи имшаб
در کوی تو رفتم به قد خم شده امشب
Худро чу маи нав ба лаб бом гирифтам
خود را چو مه نو به لب بام گرفتم
Саргаштаи марои сохта чун санги фалохан
سرگشته مرا ساخته چون سنگ فلاخن
Ҷомӣ ки ман аз гардиш айём гирифтам
جامی که من از گردش ایام گرفتم
Бар танги шукри чашм чу Сайиди нгшоим
بر تنگ شکر چشم چو سید نگشایم
То аз лаб ӯ лиззат дашном гирифтам
تا از لب او لذت دشنام گرفتم