Маро дар интизорати хонаи дил равшанаст имшаб

رخ چو برگ گل و قد دلربا داری

Паии назораи чашмами мунтазир бар равзанаст имшаб

به چشم هر که نهی پای خویش جا داری

Чу шамъами риштаҳои ашк доман доманаст имшаб

به غیر ما به همه کس سر وفا داری

Биё каз давряти мижгон ба чашмам сӯзанаст имшаб

چه حالتست که با ما سر جفا داری

Нафас дар синаам чун хор дар пероҳанаст имшаб

چه موجب است که خود را ز ما جدا داری

Шудам чун меҳру маи умрӣ ба гирди маркази олам

قسم به ذات تو ای نونهال باغ حیا

Надидам ҷузи гиёҳи сабри доғи ишқро марҳам

مراست کوی تو بهتر ز جنت المأوا

Маро гӯйанд то аҳлон нахоҳӣ зистани зини ғам

نمی کنی نظری سوی ما به استغنا

Аҷаб дорам ки пайванди ҳаётами нгслд аз ҳам

چه کرده ام چه شنیدی چه دیده ای از ما

Ки печу тоби зулфаш дар раги ҷон манаст имшаб

که جان من هدف ناوک بلا داری

Марои он ба ки хӯни худ ба хоки кӯй ӯ резам

شکفته غنچه داغم به یاد مرهم تو

Ғубории гирдам ва дар домани зулфаши дроўизм

نشسته در ته تیغم ز ابروی خم تو

Ба фикри остонаш ҳар нафас аз ҷой бархезам

به حال مرگ فتادم ز پرسش کم تو

Чаҳ созам дар сломтхонаҳи таслими нгризм

رو مدار جوانی بمیرد از غم تو

Марои икдонаҳу барқи балои сад хирманаст имшаб

تو هم جوانی و از خود امیدها داری

Ба ёдаши ҳамчуи гули оғӯши вокрдаҳи гиребонам

خمیده قامتم از بار غصه چون مه نو

Басони ҳалқа гирдоб шуд аз гиряи домонам

به خان و مان من آتش فگنده شد مرو

Чу шамъами бас ки афтодаст оташ бар раги ҷонам

دمی ز روی مروت حدیث من بشنو

зи ҷӯш ашк меларзад чу аҳли ҳашари мижгонам

ز یک سخن که رقیبم بگفت رنجه مشو

Қиёмат дар мусӣбати хонаи чашм манаст имшаб

که این ز شرط کرم باشد و وفاداری

Нигориро ки буд аз акси рӯйиши хони мони равшан

تو را همیشه بود قتل سیدا مقصود

намедодӣ ба дасти хор ҳамчун барги гули доман

نهاده غمزه به دست تو تیغ زهرآلود

Шинав эй сидои имрӯзи ҳоли рӯзгори ман

اگر چه می شوی این دم ز مرگ ناخشنود

Ҳамон дастӣ ки соиб дошт бо ӯ дӯш дар гардан

چنین مکن که پشیمان شوی ندارد سود

зи ҳиҷрон бо ғам рӯй замин дар гарданаст имшаб

که با عراقی مسکین سر جفا داری