Гўӣими бтўФиқи хдоитъолӣ ки ҳақиқати астброи холӣ кардани раҳм модааст мари хазона ӯро аз нутфаи дайгарӣ ва касе ки канизакӣ бихарад бирав воҷиб шавад андари зоҳири шариъат ки даст бирав фароз накунад то ӯро ҳақиқат маълум нашавад бҳоиз шудан он канизак ки андари раҳм ӯ нутфа касе дигар набошад ва чун ҳақиқати маълуми гашт ки раҳм ӯ покаст раво бошад ки бо канизак наздикӣ кунаду тоўили ин мавзе онаст ки канизаку зан мисласт бар мстҷибу мстҷиби мари мозўнроу мозўни мари доъиро видоъии мари ҳуҷҷатро то бнотқ ки мард ҳақиқатаст андари олами дайн ва чун ҳаддӣ бар ҳаддии дигар ки фурӯтар азу бошад масаъла бигӯед чунон бошад ки худованд бо канизаки хеш фароз ояд ё марди бозани хеш ва чун мстҷиб ё он ҳади фарвардин аз мозўни хеш ё аз он ҳади бартарин хеши бадӣгари мозўн ҷудо уфтад ё аз он соҳиби ҷзирти хеши бадӣгари соҳиби ҷзиртӣ ( уфтад ) чунон бошад ки занӣ ё канизакии бадӣгар худованд уфтад пас бидон ( ҷиҳат ) соҳиби ҷзирти дигарро нишоед ки бони доъии гушоиш сухан кунад балки боядаш сабр кардан то он доъии ончӣ аз соҳиби ҷзирти бештар шунӯдааст сӯрати бандад ва рост кунад ё онро табоҳ кунад ва раҳо кунад ҳам чунонкии худованди канизаки дасти бадв боз наниҳад то он нутфа аз раҳм ӯ тамом пок шаваду биполояд то ду гуфтори мухталифи андари нафаси он доъӣ аз ду соҳиби ҷзирт ё андари нафаси мстҷиб аз ду доъӣ шӯрида нашаваду сӯрат аз ва бҳосл ояд ва низ гўӣим ки мисли инки чун ду шавҳари бадви даст фароз кунанд чун мисли мстҷиб бошад ки ду доъии мар ӯро каниз кунанд ва ин на бзоҳр раво бошад ва на бботн ва муъмин онаст ки аз бадӣҳо зоҳиру ботин парҳез кунад ( ва ) андари некӣҳо зоҳиру ботин рағбат кунад инаст тоўилу баёни астбро ки чунин ёд карда шуду ассалом .

گوئیم بتوفیق خدایتعالی که حقیقت استبرا خالی کردن رحم ماده است مر خزانه او را از نطفه دیگری و کسی که کنیزکی بخرد برو واجب شود اندر ظاهر شریعت که دست برو فراز نکند تا او را حقیقت معلوم نشود بحایض شدن آن کنیزک که اندر رحم او نطفه کسی دیگر نباشد و چون حقیقت معلوم گشت که رحم او پاک است روا باشد که با کنیزک نزدیکی کند و تاویل این موضع آنست که کنیزک و زن مثل است بر مستجیب و مستجیب مر ماذونرا و ماذون مر داعی را وداعی مر حجت را تا بناطق که مرد حقیقت است اندر عالم دین و چون حدی بر حدی دیگر که فروتر ازو باشد مسئله بگوید چنان باشد که خداوند با کنیزک خویش فراز آید یا مرد بازن خویش و چون مستجیب یا آن حد فروردین از ماذون خویش یا از آن حد برترین خویش بدیگر ماذون جدا افتد یا از آن صاحب جزیرت خویش بدیگر صاحب جزیرتی (افتد) چنان باشد که زنی یا کنیزکی بدیگر خداوند افتد پس بدان (جهت) صاحب جزیرت دیگر را نشاید که بآن داعی گشایش سخن کند بلکه بایدش صبر کردن تا آن داعی آنچه از صاحب جزیرت بیشتر شنوده است صورت بندد و راست کند یا آنرا تباه کند و رها کند هم چنانکه خداوند کنیزک دست بدو باز ننهد تا آن نطفه از رحم او تمام پاک شود و بپالاید تا دو گفتار مختلف اندر نفس آن داعی از دو صاحب جزیرت یا اندر نفس مستجیب از دو داعی شوریده نشود و صورت از و بحاصل آید و نیز گوئیم که مثل اینکه چون دو شوهر بدو دست فراز کنند چون مثل مستجیب باشد که دو داعی مر او را کنیز کنند و این نه بظاهر روا باشد و نه بباطن و مومن آنست که از بدیها ظاهر و باطن پرهیز کند (و) اندر نیکیها ظاهر و باطن رغبت کند این است تاویل و بیان استبرا که چنین یاد کرده شد و السلام.