эй матлаъи хӯбии рух чун моҳи тамомат

ای مطلع خوبی رخ چون ماه تمامت

Бархестаи ғавғои қиёмати зи қиёмат

برخاسته غوغای قیامت ز قیامت

Дар даври рахт то набӯд ҳеҷ надомат

در دور رخت تا نبود هیچ ندامت

Моиему ғами ишқу сари кӯии маломат

ماییم و غم عشق و سر کوی ملامت

Гум карда з бе хештании роҳи саломат

گم کرده ز بی خویشتنی راه سلامت

Бо рӯй ту гӯям ки чаҳ моҳӣаст пурошӯб

با روی تو گویم که چه ماهی است پرآشوب

ё ҳиндӯии зулфат чаҳ сиёҳӣаст пурошӯб

یا هندوی زلفت چه سیاهی است پرآشوب

Аз мардуми чашмат ки сипоҳӣаст пурошӯб

از مردم چشمت که سپاهی است پرآشوب

Шаҳрӣаст пар аз фитна ва роҳӣаст пурошӯб

شهری است پر از فتنه و راهی است پرآشوب

На ҷои сФркрдн ва на рӯй иқомат

نه جای سفرکردن و نه روی اقامت

Ҳосили зи ду олам чу ғами ишқ ту дорам

حاصل ز دو عالم چو غم عشق تو دارم

Ҷузи тухми ғами ишқи ту дар сина чаҳ корам

جز تخم غم عشق تو در سینه چه کارم

эй сарви гули андоми смнбр ! зи канорам

ای سرو گل اندام سمنبر! ز کنارم

Рафтӣ ва мапиндор ки даст аз ту бидорам

رفتی و مپندار که دست از تو بدارم

Дасти ману домони ту то рӯзи қиёмат

دست من و دامان تو تا روز قیامت

Ман чун ба дар каъбаи мақсӯди расидам

من چون به در کعبه مقصود رسیدم

Аз қофилаи ворстм ва аз роҳи рҳидм

از قافله وارستم و از راه رهیدم

Бо яди қалами насх бар он байт кашидам

با ید قلم نسخ بر آن بیت کشیدم

Ман панди рафиқон мувофиқ нишнидам

من پند رفیقان موافق نشنیدم

Зонрў шудам омоҷгаҳи тири маломат

زانرو شدم آماجگه تیر ملامت

эй сӯфии пашмина ! либоси асалии пӯш

ای صوفی پشمینه! لباس عسلی پوش

Зон хам ки хирад мезанад аз шавқи мяши ҷӯш

زان خم که خرد می زند از شوق میش جوش

Бигузар ту аз ин хирқау саҷҷода ва май нӯш

بگذر تو از این خرقه و سجاده و می نوش

Коникс ки насиҳати з бузургон накунад гӯш

کانکس که نصیحت ز بزرگان نکند گوش

Бисёр бхоиди сари ангушти надомат

بسیار بخاید سر انگشت ندامت

Гар толиби онӣ ки бимонад зи ту номӣ

گر طالب آنی که بماند ز تو نامی

Аз хонаи номӯси бурун на ду се гомӣ

از خانه ناموس برون نه دو سه گامی

Қурбони шӯ ва бишинав зи лаби ёри паёмӣ :

قربان شو و بشنو ز لب یار پیامی:

Айёр чу Мансур шавад бар ҳамаи комӣ

عیار چو منصور شود بر همه کامی

Онаст ки бар дори кашандаш ба аломат

آن است که بر دار کشندش به علامت

Гар дар чамани он сарви сеӣ роҳи برارد

گر در چمن آن سرو سهی راه برآرد

Ҳайҳот ки қади сарв ба дилхоҳи برارد

هیهات که قد سرو به دلخواه برآرد

Чун оҳи насимӣ ба саҳаргоҳи برارد

چون آه نسیمی به سحرگاه برآرد

Ҳргаҳ ки ҷалол аз ғами дили оҳи برارد

هرگه که جلال از غم دل آه برآرد

Суккон самовот биноланд тамомат

سکان سماوات بنالند تمامت