эй зи сунбули бастаи мӯяти соябон бар офтоб

ای ز سنبل بسته مویت سایبان بر آفتاب

Зулфи мишкӣнати шаб қадарасту рӯяти моҳтоб

زلفِ مشکینت شب قدر است و رویت ماهتاب

Масти он чашми хушам каз нотавонии як нафас

مستِ آن چشمِ خوشم کز ناتوانی یک نفس

Ҳамчуи бахт хуфтаам сари барнамеи оради зи хоб

همچو بختِ خفته‌ام سر برنمی‌آرد ز خواب

То шуд аз шамъи рахти парвонаи ҷони бохабар

تا شد از شمعِ رُخَت پروانهٔ جان باخبر

Ҳаст чун зулфат бар оташи риштаи ҷонам ба тоб

هست چون زلفت بر آتش رشتهٔ جانم به تاب

Ҳур айн биншинад аз ғайрат бар оташ чун сапанд

حورِ عین بنشیند از غیرت بر آتش چون سپند

Дар биҳишт аз чеҳра чун фардои барандозии ниқоб

در بهشت از چهره چون فردا براندازی نقاب

зи орзӯии васли рӯят ҳар шаб эй ма то саҳар

ز آرزوی وصلِ رویت هر شب ای مَه تا سحر

Ҷузи хаёлати чашми мо нақшӣ наме бандад бар об

جز خیالت چشم ما نقشی نمی‌بندد بر آب

Нест аз меҳри рахти холии вуҷӯдами зарра Эй

نیست از مهر رخت خالی وجودم ذره‌ای

Кӣ вуҷӯд зарра бошад бе вуҷӯди офтоб

کی وجود ذره باشد بی‌وجود آفتاب

Аз рақибони хитобин рух бапуш эй ма ки шуд

از رقیبانِ خطابین رخ بپوش ای مَه که شد

Чеҳраи пўшонидн аз чашми хтобинони савоб

چهره پوشانیدن از چشمِ خطابینان صواب

Соқио май даҳ ки дар давр лаб мегаван дӯст

ساقیا می ده که در دورِ لبِ میگونِ دوست

Сад ҷаҳони тақво наме арзад ба як ҷоми шароб

صد جهان تقوی نمی‌ارزد به یک جام شراب

Ҷони беморам чу ёди он лаб мегаван кунад

جانِ بیمارم چو یادِ آن لبِ میگون کند

Соғари чашмам лаболаб гардад аз лаъли музоб

ساغرِ چشمم لبالب گردد از لعل مذاب

Бод агар бӯе ба чин аз накҳати зулфати барад

باد اگر بویی به چین از نکهتِ زلفت برد

Аз ҳасад уфтад дар оташи ҳамчуи анбари машки ноб

از حَسَد افتد در آتش همچو عنبر مشکِ ناب

Давр ҷом мебигардон имшаб эй соқӣ ки ман

دور جام می بگردان امشب ای ساقی که من

Аз май савдои чашмаши сархушами масту хароб

از می سودای چشمش سرخوشم مست و خراب

Чун лаби лаълат ки бозори шукр бишкаста аст

چون لبِ لعلت که بازارِ شکر بشکسته است

Гавҳари назми насимӣ , қимат дар хўшоб

گوهرِ نظمِ نسیمی، قیمت دُرِّ خوشاب