Ба кӯии ёр май бояд ба чашм хӯн фишон рафтан

به کوی یار می‌باید به چشم خون‌فشان رفتن

Ки даст хушк натавон ҷониби он остон рафтан

که دست خشک نتوان جانب آن آستان رفتن

Нишони ишқ агар дорӣ ба роҳи ошиқӣ май рӯ

نشان عشق اگر داری به راه عاشقی می‌رو

Ки ин раҳи бас хатарнок аст натавон бенишон рафтан

که این ره بس خطرناک است نتوان بی‌نشان رفتن

Дило рафтӣ зи шоми зулфи сӯии моҳи рухсораш

دلا رفتی ز شام زلف سوی ماه رخسارش

Ҳамин бошад раҳи як моҳаро шаб дар миён рафтан

همین باشد ره یک‌ماهه را شب در میان رفتن

Ба кӯяш май рӯм чун сабз шуд хати гирди рухсораш

به کویش می‌روم چون سبز شد خط گرد رخسارش

Баромади сабзаҳо , хоҳам ба гашти бӯстон рафтан

برآمد سبزه‌ها، خواهم به گشت بوستان رفتن

( қадам дар на ба сидқи дил агар дар ишқи як рангӣ

(قدم در نه به صدق دل اگر در عشق یک‌رنگی

Ки роҳи каъбаро муъмин ба сидқи дили тавон рафтан )

که راه کعبه را مؤمن به صدق دل توان رفتن)

Чу шуд оҳам ба кӯй ӯ дигар берун наме ояд

چو شد آهم به کوی او دگر بیرون نمی‌آید

Туро эй ашк май бояд ба кӯй ӯ равон рафтан

تو را ای اشک می‌باید به کوی او روان رفتن

Насимии баҳр дидораш равад ҷинат , аҷаб набӯд

نسیمی بهر دیدارش رود جنت، عجب نبود

Биҳиштии сӯратӣ гар ҳаст дӯзах ме тавон рафтан

بهشتی صورتی گر هست دوزخ می‌توان رفتن