эй моҳи ман чаро ситам аз сари гирифта Эй
ای ماه من چرا ستم از سر گرفتهای
Вази ман чаҳ дидае ки назари баргирифта Эй
وز من چه دیدهای که نظر برگرفتهای
эй зулфи ёри ман ! чаҳ ҳумое ки рӯзу шаб
ای زلف یار من! چه همایی که روز و شب
Бар фарқи офтоби Рахши пари гирифта Эй
بر فرق آفتاب رخش پر گرفتهای
эй шамъи ҷони гудоз ! ки бо гиря эйу сӯз
ای شمع جانگداز! که با گریهای و سوز
Маълум шуд каз оташ дил даргирифта Эй
معلوم شد کز آتش دل درگرفتهای
Бо зоҳидии савмиъа асрор ме магӯӣ
با زاهدان صومعه اسرار میمگوی
эй ринди ҳақи шинос ! ки соғари гирифта Эй
ای رند حقشناس! که ساغر گرفتهای
Ҷузи аҳли дор , васл аноолҳқ наёфтанд
جز اهل دار، وصل اناالحق نیافتند
эй онкии роҳи масҷиду минбари гирифта Эй
ای آنکه راه مسجد و منبر گرفتهای
Домани туро расад ки фишонӣ ба коинот
دامن تو را رسد که فشانی به کاینات
эй ошиқӣ ки домани дилбари гирифта Эй
ای عاشقی که دامن دلبر گرفتهای
Шуд хонаи хаёли Рахши хилвати назар
شد خانهٔ خیال رخش خلوت نظر
эй хоб аз он сабаби ту раҳ даргирифта Эй
ای خواب از آن سبب تو ره درگرفتهای
эй бод бо ту ҳаст дами исавии магар
ای باد با تو هست دم عیسوی مگر
Бӯе аз он ду зулфи мънбри гирифта Эй
بویی از آن دو زلف معنبر گرفتهای
То баргирифтае зи Рахши бурқаъ эй сабо
تا برگرفتهای ز رخش برقع ای صبا
Сад хурда бар изори гултар гирифта Эй
صد خرده بر عذار گل تر گرفتهای
Мроти ғмгсор агар нестам чаро
مرآت غمگسار اگر نیستم چرا
Рӯем чу пушти оина дар зари гирифта Эй
رویم چو پشت آینه در زر گرفتهای
Рӯй замин чу абри баҳории нсимё
روی زمین چو ابر بهاری نسیمیا
Аз оби дида дар дару гавҳари гирифта Эй
از آب دیده دَر دُر و گوهر گرفتهای