Манеҳ бар меҳри хубони дил , насиб аз ақл агар дорӣ

منه بر مهر خوبان دل، نصیب از عقل اگر داری

Ки хубони меҳрбониро намедонанду дилдорӣ

که خوبان مهربانی را نمی دانند و دلداری

Сару ҷону ҷаҳон эй дил бирав дар кор зулфаш кун

سر و جان و جهان ای دل برو در کار زلفش کن

Агар бо дилбарони дории сари меҳру дили ёрӣ

اگر با دلبران داری سر مهر و دل یاری

зи чашму зулф ӯ гуфтам нигаҳ дорам дили худ ро

ز چشم و زلف او گفتم نگه دارم دل خود را

Вале дил мебаранд эшон ба ҷодуӣу айёрӣ

ولی دل می برند ایشان به جادویی و عیاری

Дили ошуфта май ҷустами зи зулфаш , гуфт к-эии оқил

دل آشفته می جستم ز زلفش، گفت کای عاقل

Кӣ уфтад дар чунин домии дил ҳар зори бозорӣ

کی افتد در چنین دامی دل هر زار بازاری

Рух аз ишқаш чу зар кардан ба осонии тавон лекин

رخ از عشقش چو زر کردن به آسانی توان لیکن

Биёи ҷони сарф ишқаш кун агар саррофи дидорӣ

بیا جان صرف عشقش کن اگر صراف دیداری

Ҷафоу ҷаври маҳбӯбони даво май хўонмш чун ман

جفا و جور محبوبان دوا می خوانمش چون من

Туро чун гӯям эй ҳурӣ ! ки маҳбӯби ҷФокорӣ

تو را چون گویم ای حوری! که محبوب جفاکاری

Ба ҳар доғӣ ва ҳар дардӣ ки мехоҳӣ бикаш мо ро

به هر داغی و هر دردی که می خواهی بکش ما را

Ки моро нест дар ишқати дили озорӣу безорӣ

که ما را نیست در عشقت دل آزاری و بیزاری

зи озори туам ҳаргиз нахоҳад хотир озурдан

ز آزار توام هرگز نخواهد خاطر آزردن

Ба қаҳрам гар бисӯзоне ба ҷаврамгар бёзорӣ

به قهرم گر بسوزانی به جورم گر بیازاری

Магар чун чашм бемораш намехоҳад ки бошад хуш

مگر چون چشم بیمارش نمی خواهد که باشد خوش

Дилии кӯ каз чунин савдо надорад чашми бедорӣ

دلی کو کز چنین سودا ندارد چشم بیداری

Ба сад ҷони толиби онам ки зулфатро бадасти орм

به صد جان طالب آنم که زلفت را بدست آرم

Ба зулф худ намедонам диламро кӣ бадасти оре

به زلف خود نمی دانم دلم را کی بدست آری

Дило дар ишқ агар ширии ҷигар май боядат хӯрдан

دلا در عشق اگر شیری جگر می بایدت خوردن

Ки бошад одати шерони зи дасти дили ҷгрхўорӣ

که باشد عادت شیران ز دست دل جگرخواری

Ту май пиндорӣ эй носеҳ ки пандӣ башнавад ошиқ

تو می پنداری ای ناصح که پندی بشنود عاشق

Қабули самъи аҳли дил чаҳ панди оре ? чаҳ пиндорӣ ?

قبول سمع اهل دل چه پند آری؟ چه پنداری؟

зи кори ?данеу уқбои туоне даст агар шустан

ز کار دنیی و عقبی توانی دست اگر شستن

Дро дар кори ишқ эй дил ки бе шаки марди ин корӣ

درآ در کار عشق ای دل که بی شک مرد این کاری

Насимии ҷони супурд эй дил ба зулфи ънброФшонш

نسیمی جان سپرد ای دل به زلف عنبرافشانش

Ту низ ар ошиқӣ бояд ки ҷон мардона бисипорӣ

تو نیز ار عاشقی باید که جان مردانه بسپاری