Ҳар киро андешаи зулфи ту дар дил ҷо гирифт

هر که را اندیشه زلف تو در دل جا گرفت

Чун сари зулфати вуҷӯдаши мӯ ба мӯ савдо гирифт

چون سر زلفت وجودش مو به مو سودا گرفت

Бо даҳонати нукта Эй мегуфтам аз асрори ғайб

با دهانت نکته‌ای می‌گفتم از اسرار غیب

Солик аз роҳи ҳақиқати хурдаҳо бар мо гирифт

سالک از راه حقیقت خرده‌ها بر ما گرفت

То дам аз буии сари зулф ту зад боди сабо

تا دم از بوی سر زلف تو زد باد صبا

Оҳӯии чини нофаи худро ба зер по гирифт

آهوی چین نافه خود را به زیر پا گرفت

Дар зи рашки назми дандони туу гуфтори ман

در ز رشک نظم دندان تو و گفتار من

Шуд зи чашми афтода чун ашку раҳ дарё гирифт

شد ز چشم افتاده چون اشک و ره دریا گرفت

Эминаст аз ғорати андешау тороҷи ақл

ایمن است از غارت اندیشه و تاراج عقل

Ишқат эй султони хубони кишвари дил то гирифт

عشقت ای سلطان خوبان کشور دل تا گرفت

Чун ту бе ҳамтои нигорӣ дар ду олам кас надид

چون تو بی همتا نگاری در دو عالم کس ندید

Кӯи ду оламро ба ҳасан рӯй беҳамто гирифт

کو دو عالم را به حسن روی بی همتا گرفت

Май хур , эй дил , май зи дасти соқии ишқ ва мабош

می خور، ای دل، می ز دست ساقی عشق و مباش

Дар ғами зоҳид ки ӯ нагирифт соғар ё гирифт

در غم زاهد که او نگرفت ساغر یا گرفت

Дар ҳавои ишқати он мурғӣ ки фонӣ шуд зи хеш

در هوای عشقت آن مرغی که فانی شد ز خویش

Бар сари қофи ҳувияти манзил анқо гирифт

بر سر قاف هویت منزل عنقا گرفت

эй ки май хуоне ба сарву сидраи қадашро хамӯш

ای که می خوانی به سرو و سدره قدش را خموش

Кори сарв аз қаду боло кӣ чунин боло гирифт

کار سرو از قد و بالا کی چنین بالا گرفت

Бо ту имрӯз аз куҷо ёбад маҷоли иттисол

با تو امروز از کجا یابد مجال اتصال

Ҳар киро домани умеди ваъда фардо гирифт

هر که را دامن امید وعده فردا گرفت

То аён шуд оташи ании анои аллоҳ аз рахт

تا عیان شد آتش انی انا الله از رخت

Шуълаи нури таҷаллӣ дар ҳама ашё гирифт

شعله نور تجلی در همه اشیا گرفت

Чун насимӣ ҳар ки рӯят дид ано алҳақ ме занад

چون نسیمی هر که رویت دید انا الحق می زند

Рух бпушон варна хоҳад кун факон ғавғо гирифт

رخ بپوشان ورنه خواهد کن فکان غوغا گرفت