Шаби қадар бе қаророни сари зулф ёр бошад

شب قدر بی قراران سر زلف یار باشد

Маи иди некбахтони рухи он нигор бошад

مه عید نیکبختان رخ آن نگار باشد

зи ғамнигор аз онру шабу рӯз бе қарорам

ز غم نگار از آنرو شب و روز بی قرارم

Ки ғамаш намегузорад ки маро қарор бошад

که غمش نمی گذارد که مرا قرار باشد

Ман масти ринд аз онам зи ғами хумори фориғ

من مست رند از آنم ز غم خمار فارغ

Ки нахурдаам ман он май ки дар ӯ хумор бошад

که نخورده ام من آن می که در او خمار باشد

Ба каманди зулф ӯ дил ба муроди худ надодам

به کمند زلف او دل به مراد خود ندادم

Ба бало шудани муқайяд на ба ихтиёр бошад

به بلا شدن مقید نه به اختیار باشد

Ҳилла бас кун эй мухолиф ки ба таънаи тарки ишқаш

هله بس کن ای مخالف که به طعنه ترک عشقش

Накунад касе ки ӯро ғами ишқ кор бошад

نکند کسی که او را غم عشق کار باشد

з рақиб дорам афғон на зи ҷаври дилбари оре

ز رقیب دارم افغان نه ز جور دلبر آری

Дили зори ошиқи гули алмши з хор бошад

دل زار عاشق گل المش ز خار باشد

Макун оҳу зорӣ эй дил ки з рӯй бе ниёзӣ

مکن آه و زاری ای دل که ز روی بی نیازی

Гул аз он чаҳ бок дорад ки ҳазор зор бошад

گل از آن چه باک دارد که هزار زار باشد

Ба навозишии диламро ба карам чу ваъда додӣ

به نوازشی دلم را به کرم چو وعده دادی

Магузор беш аз инаш ки дар интизор бошад

مگذار بیش از اینش که در انتظار باشد

Сари мо зи сари ишқаш сардор дорад оре

سر ما ز سر عشقش سردار دارد آری

Сари муҳаррами аноолҳқи сари пой дор бошад

سر محرم اناالحق سر پای دار باشد

Снмо ба рағми душмани назарӣ ба дӯстон кун

صنما به رغم دشمن نظری به دوستان کن

Ки навозиши муҳибон на гунаҳ на ор бошад

که نوازش محبان نه گنه نه عار باشد

Ба ҷуз аз ҳавоӣ Кувайт накунад ҳаваси насимӣ

به جز از هوای کویت نکند هوس نسیمی

зи муҳаббати ту рӯзӣ ки таниш ғубор бошад

ز محبت تو روزی که تنش غبار باشد