Солҳо гӯшаи ғам буд дили риши маро

سال‌ها گوشه غم بود دل ریش مرا

Боз ишқ омаду афканд ба ташвиши маро

باز عشق آمد و افکند به تشویش مرا

Сӯрат шайх гирифтам ба назар ҷилва надошт

صورت شیخ گرفتم به نظر جلوه نداشت

Ба анояти назарӣ эй бачаи дарвеши маро

به عنایت نظری ای بچه درویش مرا

Бо каманди сари зулфати ҳама чашмаст ба чашм

با کمند سر زلفت همه چشم است به چشم

Мардум ар ном кунад сӯфии бдкиши маро

مردم ار نام کند صوفی بدکیش مرا

Нимаи ҷонии бустон аз ману узри мпазир

نیمه جانی بستان از من و عذر مپذیر

Ки гумон нест ки мқдии ҳиллаи зини пеши маро

که گمان نیست که مقدی هله زین پیش مرا

Ҳама шӯраст ки афкандаи лбонт ба Ироқ

همه شور است که افکنده لبانت به عراق

эй ҳамаи шӯри нигоҳӣ ба дили риши маро

ای همه شور نگاهی به دل ریش مرا

Боз кун турраи чли тор ки аз ёд бирафт

باز کن طره چل تار که از یاد برفت

Зикри сад донаи зӯҳҳоди каҷи андеши маро

ذکر صد دانه زهاد کج‌اندیش مرا