Ҳар шикорӣ шавад аз чнгл шаҳбоз гирифт

هر شکاری شود از چنگل شهباز گرفت

Ҷузи ду чашмат ки дил аз вай натавон боз гирифт

جز دو چشمت که دل از وی نتوان باز گرفت

зи шабихуни сари зулф ба ҳам нозада чашм

ز شبیخون سر زلف به هم نازده چشم

Сари роҳами сипаҳи ғамза ғаммоз гирифт

سر راهم سپه غمزه غماز گرفت

Машкан эй дӯсти диламро ки дигар ноед боз

مشکن ای دوست دلم را که دگر ناید باز

Мурғи ваҳшии ҷӯи зи домии раҳ парвоз гирифт

مرغ وحشی جو ز دامی ره پرواز گرفت

Чашми улфат дигар эй ҳуши мадор аз сари ман

چشم الفت دگر ای هوش مدار از سر من

Хобгоҳӣ ки ту дидӣ ҳашам ноз гирифт

خوابگاهی که تو دیدی حشم ناز گرفت

Лаби лаълати зи хати сабз ҷаҳон кард сиёҳ

لب لعلت ز خط سبز جهان کرد سیاه

Мотами ғмздгони нек ба эъзоз гирифт

ماتم غمزدگان نیک به اعزاز گرفت

Ҷодўонти ҳамагар саҷдаи барад пеш сазост

جادوانت همه گر سجده برد پیش سزاست

Ки фусуни нигаҳати поя эъҷоз гирифт

که فسون نگهت پایه اعجاز گرفت

Дили ғами ишқ ба сад парда ниҳон дошт зи халқ

دل غم عشق به صد پرده نهان داشت ز خلق

Зулф ӯ боз шуду пардаи з ҳар роз гирифт

زلف او باز شد و پرده ز هر راز گرفت

Воъиз ар ғайби назарбозӣ мо кард чаҳ бок

واعظ ار غیب نظربازی ما کرد چه باک

Ниро гӯш набояд ба ҳар овоз гирифт

نیّرا گوش نباید به هر آواز گرفت