Зулф ба малики ҳасан ба сар то каллаи ниҳод

زلف به ملک حسن به سر تا کله نهاد

Бардошти пои нихват ва бар фарқи маи ниҳод

برداشت پای نخوت و بر فرق مه نهاد

Одат набӯд теғ кашӣдан ба рӯй моҳ

عادت نبود تیغ کشیدن به روی ماه

Ин расми тозаро хами зулфи сияҳи ниҳод

این رسم تازه را خم زلف سیه نهاد

Гар олимӣ кашад чаҳ аҷаби тарки чашм ӯ

گر عالمی کشد چه عجب ترک چشم او

Ёсои қатли ом на ин Подшаҳи ниҳод

یاسای قتل عام نه این پادشه نهاد

Бар буии хоки пои ту дил ҳар куҷо ки дид

بر بوی خاک پای تو دل هر کجا که دید

Хок раҳеаст рӯй бар он хоки раҳи ниҳод

خاک رهی است روی بر آن خاک ره نهاد

Оҳӯи чунин нигаҳ накунад чашми ту магар

آهو چنین نگه نکند چشم تو مگر

Қонӯни дайгарии з барои нигаҳи ниҳод

قانون دیگری ز برای نگه نهاد

Мардуми ҳилол ӯ ба сарангушт ме намӯд

مردم هلال او به سرانگشت می‌نمود

Ин моҳи расмро ба шаби чаҳордаҳи ниҳод

این ماه رسم را به شب چهارده نهاد

Чашмати харобии дили моро ба хат нагуфт

چشمت خرابی دل ما را به خط نگفت

То рӯ ба кишвари дили мо бо сипаҳи ниҳод

تا رو به کشور دل ما با سپه نهاد

Тоъат буд назора ба ҳар моҳи ту валек

طاعت بود نظاره به هر ماه تو ولیک

Абрӯӣ ӯ барои ман инро гунаҳи ниҳод

ابروی او برای من این را گنه نهاد

Биллоҳ ки ҷуз ба меҳри шаҳаншоҳи луи кашф

بالله که جز به مهر شهنشاه لو کشف

Ҳар кӯи ниҳоди дил ба хаёли табаи ниҳод

هر کو نهاد دل به خیال تبه نهاد

Нири ҳавои равзаи ризвони зи сари биҳишт

نیر هوای روضۀ رضوان ز سر بهشت

Ҳар кас ки рӯй бар дар ин боргаҳи ниҳод

هر کس که روی بر در این بارگه نهاد