Зулфи ҷонони саҳар аз боди сабо дар ҳам шуд
زلف جانان سحر از باد صبا در هم شد
Оқилони мужда ки занҷири ҷунун муҳкам шуд
عاقلان مژده که زنجیر جنون محکم شد
Соқӣ аз нашъаи мастии калла аз сар нагирифт
ساقی از نشئه مستی کله از سر نگرفت
Гулу сунбул ба ҳам омехт аҷаб олам шуд
گل و سنبل به هم آمیخت عجب عالم شد
Солҳо буд ки дорои сару сомонӣ буд
سالها بود که دارا سر و سامانی بود
Оқибат дар сари он зулфи хами андар хам шуд
عاقبت در سر آن زلف خم اندر خم شد
зи хати сабзи ту мӯе ба ду олам надаҳум
ز خط سبز تو مویی به دو عالم ندهم
То нагӯйӣ сари мӯеи зи иродат кам шуд
تا نگویی سر مویی ز ارادت کم شد
Гуфтамаш хӯни дили ошиқи бечора ки хӯрд
گفتمش خون دل عاشق بیچاره که خورد
Ба табассум нигаҳӣ кард сухан мубҳам шуд
به تبسم نگهی کرد سخن مبهم شد
Сар ҳар гули дили сад булбули мискини хӯни гашт
سر هر گل دل صد بلبل مسکین خون گشت
То дар ин гулшани пари хори дилӣ хуррам шуд
تا در این گلشن پر خار دلی خرم شد
Гуфтамаш ҳеҷ сари суҳбати мо дорӣ ? гуфт
گفتمش هیچ سر صحبت ما داری؟ گفت
Кӣ париро ҳаваси инс банӣ одам шуд
کی پری را هوس انس بنیآدم شد
Машк бо ҳеҷ ҷароҳат нишнидам ки бсохт
مشک با هیچ جراحت نشنیدم که بساخت
Ғайри зулфат ки дили риши маро марҳам шуд
غیر زلفت که دل ریش مرا مرهم شد
Кам мабод аз сари ман сояи ин ғами нир
کم مباد از سر من سایهٔ این غم نیر
КоФттоҳӣ шуд агар кори марои зин ғам шуд
کافتتاحی شد اگر کار مرا زین غم شد