Шуд рӯй ёри ҷилвагар аз зулфи машки без
شد روی یار جلوهگر از زلف مشکبیز
Субҳ умед медиҳад эй бахти хуфтаи хез
صبح امید میدهد ای بخت خفته خیز
Зини сон ки мезанад раҳи халқи ин бути Ироқ
زینسان که میزند ره خلق این بت عراق
Имсол муттафиқ нашавад халқро ҳҷиз
امسال متفق نشود خلق را حجیز
То худ чаҳ ҳо кунад зи хатои чашми маст ӯ
تا خود چهها کند ز خطا چشم مست او
Зон бештар ки дӯсти з душман диҳад тамиз
زان بیشتر که دوست ز دشمن دهد تمیز
Як шаҳрро бар зи қиёмат қиёматӣ аст
یک شهر را بر ز قیامت قیامتی است
Фардои магари ту бози ниёе ба растхез
فردا مگر تو باز نیایی به رستخیز
Бар хорем мубину фурӯди оби чашми ман
بر خواریم مبین و فرود آب چشم من
Юсуф ба ҳар куҷо ки нишинад буд азиз
یوسف به هر کجا که نشیند بود عزیز
Борӣ ба дӯши бастаи зи дастори шайхи шаҳр
باری به دوش بسته ز دستار شیخ شهر
Ореи арӯс зишт кунад ҷаҳд дар ҷҳиз
آری عروس زشت کند جهد در جهیز
Бо ёди зулф ёр нахобам шубони тор
با یاد زلف یار نخوابم شبان تار
КоФъии газандаро буд аз ресмони гурез
کافعی گزنده را بود از ریسمان گریز
Дар ҳеҷ шаръӣ боз напурсанд хӯни сайд
در هیچ شرعی باز نپرسند خون صید
Баркаш камони дурусти фурӯ на ба теғи тез
برکش کمان درست فرو نه به تیغ تیز
Дар сайдгоҳи дили ҳама то чашм меравад
در صیدگاه دل همه تا چشم میرود
Мураккаб битозу сайди барандоз ва хӯн бирез
مرکب بتاز و صید برانداز و خون بریز
Он хати сабзи равнақи зулфи сияҳи шикаст
آن خط سبز رونق زلف سیه شکست
Ҳқо ки интиқом намонад ба растхез
حقا که انتقام نماند به رستخیز
эй хати зи баҳри тирагии рӯзгори мо
ای خط ز بهر تیرگی روزگار ما
Кофӣ набӯд турраи шбрнг то ту низ
کافی نبود طرۀ شبرنگ تا تو نیز
Хубони ?бирти бизоъати мзҷоаҳи ҷон ба каф
خوبان برت بضاعت مزجاة جان به کف
Оварда бо тарона ё аиҳо алъзиз
آورده با ترانۀ یا ایها العزیز