Кадоми қиссаи даҳуми шарҳу зор ва зор бинолам

کدام قصه دهم شرح و زار و زار بنالم

зи ҷаври шимури дағо ё зи ҳиҷр ёр бинолам

ز جور شمر دغا یا ز هجر یار بنالم

Кадоми сару бболои нозанин ту монад

کدام سر و ببالای نازنین تو ماند

Ки ман бсоиаҳи он сарв ҷӯйбор бинолам

که من بسایۀ آن سرو جویبار بنالم

Ҳазор сол гарм бошад умри аигли раъно

هزار سال گرم باشد عمر ایگل رعنا

Биёад рӯй ту ҳар лаҳза чун ҳазор бинолам

بیاد روی تو هر لحظه چون هزار بنالم

Чу аз канори туам давр дошт чархи ҷафои ҷӯ

چو از کنار توام دور داشت چرخ جفا جو

Шавам биёади канорати баҳр канор бинолам

شوم بیاد کنارت بهر کنار بنالم

Куҷои рӯми чаканами дарди хеш бкаҳ гӯям

کجا روم چکنم درد خویش بکه گویم

Биҷузи ту пеш ки аишоаҳ тоҷдор бинолам

بجز تو پیش که ایشاه تاجدار بنالم

Гарми замона рҳоӣӣ диҳад зи қайди мухолиф

گرم زمانه رهائی دهد ز قید مخالف

Рӯм чу оҳӯии ваҳшӣ бкўҳсор бинолам

روم چو آهوی وحشی بکوهسار بنالم

Надоди шимури амонам ки дар бар ту замонӣ

نداد شمر امانم که در بر تو زمانی

Брўзгори худ зи ҷавр рўзргор бинолам

بروزگار خود ز جور روزرگار بنالم

Гарм ҳаёт бимонад рӯми бтрбти модар

گرم حیات بماند روم بتربت مادر

зи дасти шимури ҷФоҷўӣ нобакор бинолам

ز دست شمر جفاجوی نابکار بنالم

Мекашад снки бадали нолаи бкҳсори имшаб

میکشد سنک بدل ناله بکهسار امشب

Ки ғизолон ҳарам гашта гирифтори имшаб

که غزالان حرم گشته گرفتار امشب

Турфаи шӯри баст дар ин пардаи зангори магар

طرفه شور بست در این پردۀ زنگار مگر

Хаймаи сибт набӣ гашта нигунсори имшаб

خیمۀ سبط نبی گشته نگونسار امشب

Монда дар дасти адуи қофилаи роҳи ҳарам

مانده در دست عدو قافلۀ راه حرم

Рафта дар хоби магари қофилаи солори имшаб

رفته در خواب مگر قافله سالار امشب

Сайли хӯни роҳи фурӯи баста бисёра магар

سیل خون راه فرو بسته بسیاره مگر

Ки фурӯи мондаи ҳамеи ноқаи зрФтори имшаб

که فرو مانده همی ناقه زرفتار امشب

Пурзанони зи оташи дили бзъаҳи Заҳрои батул

پرزنان ز آتش دل بضعۀ زهرای بتول

Ҳамчуи парвонаи бадӯри сари бемори имшаб

همچو پروانه بدور سر بیمار امشب

Бонувони ҳарами исмату эъзози ифоф

بانوان حرم عصمت و اعزاز عفاف

Ҳама дар фикри сари кӯчау бозори имшаб

همه در فکر سر کوچه و بازار امشب

Зайнаби зор дар андешаи бедоди синон

زینب زار در اندیشۀ بیداد سنان

Ғофил аз ҳолати ҷамоли ҷФокори имшаб

غافل از حالت جمال جفاکار امشب