Ба зер ҳар бен мӯи чашми равшании сети маро

به زیر هر بن مو چشم روشنی‌ست مرا

Ба равшаноӣ ҳар зарраи равзании сети маро

به روشنایی هر ذره روزنی‌ست مرا

Шуҳуди бут , зи парокандагӣам боз оварад

شهود بت، ز پراکندگیم باز آورد

Далели роҳи ҳақиқати брҳмнии сети маро

دلیل راه حقیقت برهمنی‌ست مرا

Чу соя аз ҳамаи сӯ дар камӣни хуршедам

چو سایه از همه‌سو در کمین خورشیدم

Ба ҳркҷои бен хории сети маскании сети маро

به هرکجا بن خاری‌ست مسکنی‌ست مرا

Ба ҳар сарочау бустон фурӯ наме оем

به هر سراچه و بستان فرو نمی‌آیم

Буруни зи олами хокии нишемании сети маро

برون ز عالم خاکی نشیمنی‌ست مرا

Ба дӯстӣ ки зи баси маҳви лиззати ишқам

به دوستی که ز بس محو لذت عشقم

Ба коинот надонам ки душмании сети маро

به کاینات ندانم که دشمنی‌ست مرا

Ҳазор нолаи зи наҳр ва з равад май шинавам

هزار ناله ز نهر و ز رود می‌شنوم

зи сайли гиря чу кҳсори домании сети маро

ز سیل گریه چو کهسار دامنی‌ست مرا

зи хӯшаҳои сиришками лаболаб оғӯш аст

ز خوشه‌های سرشکم لبالب آغوش است

зи ҳосилӣ ки туро нест хирмании сети маро

ز حاصلی که تو را نیست خرمنی‌ست مرا

Агар ба маърака дар хӯн фитодаам чаҳ аҷаб

اگر به معرکه در خون فتاده‌ام چه عجب

Ҳамеша разм ба чун худ Таҳамтании сети маро

همیشه رزم به چون خود تهمتنی‌ست مرا

Дареғ Рахш форуманду рӯз бегуҳ шуд

دریغ رخش فروماند و روز بی‌گه شد

Дарин сафар ки ба ҳар гоми раҳзании сети маро

درین سفر که به هر گام رهزنی‌ست مرا

Кадом май ки пас аз мастем хумори надод ?

کدام می که پس از مستیم خمار نداد؟

Чу шиша дар таҳ ҳар хандаи шевании сети маро

چو شیشه در ته هر خنده شیونی‌ست مرا

Биёи зи меҳнат ҷон канданам халосии даҳ

بیا ز محنت جان کندنم خلاصی ده

Ки дам задани зи фироқи ту мурдании сети маро

که دم زدن ز فراق تو مردنی‌ست مرا

Гудохт ҷисм « назирӣ » зи диққати назарам

گداخت جسم «نظیری» ز دقت نظرم

Ки дидаи тангтар аз чашми сӯзании сети маро

که دیده تنگ‌تر از چشم سوزنی‌ست مرا