Гӯши гул май дард аз муждаи ҳангоми сабӯҳ

گوش گل می‌درد از مژده هنگام صبوح

Зинда дорад нафаси боди сабои номи сабӯҳ

زنده دارد نفس باد صبا نام صبوح

То ту мурғи фалакии роми гулистон шуда Эй

تا تو مرغ فلکی رام گلستان شده‌ای

Хоби мурғи саҳарии рафтау ороми сабӯҳ

خواب مرغ سحری رفته و آرام صبوح

Ту гул аз мурғи саҳаргоҳи грФтортрӣ

تو گل از مرغ سحرگاه گرفتارتری

Дам назд субҳи ҳарифон ки нашуд доми сабӯҳ

دم نزد صبح حریفان که نشد دام صبوح

Дар чунон базм ки мисатон саҳар ме нӯшанд

در چنان بزم که مستان سحر می نوشند

Софи хуршед буд дарди таҳи ҷоми сабӯҳ

صاف خورشید بود درد ته جام صبوح

Дасту по гар назанад дил нафасам ме гирад

دست و پا گر نزند دل نفسم می گیرد

Дар гӯ рӯз фитодам зи лаби боми сабӯҳ

در گو روز فتادم ز لب بام صبوح

Ғами матлӯби сар аз доман дилбар нагирифт

غم مطلوب سر از دامن دلبر نگرفت

Лобаи ним шабӣ кардаму иброми сабӯҳ

لابه نیم شبی کردم و ابرام صبوح

Ҳақи дидор « назирӣ » нарасонӣ ба тамом

حق دیدار «نظیری » نرسانی به تمام

Дар шаби васли адо гар накунӣ воми сабӯҳ

در شب وصل ادا گر نکنی وام صبوح