Бар фалаки тобади масеҳои риштаи зуннори мо
بر فلک تابد مسیحا رشته زنار ما
Бар замин Мансур афрозад сутуни дори мо
بر زمین منصور افرازد ستون دار ما
Аз маосӣ тавба мекардем пеш аз ошиқӣ
از معاصی توبه میکردیم پیش از عاشقی
Ин замон исён шавад аз куфри истиғфори мо
این زمان عصیان شود از کفر استغفار ما
Аз шубони водии эмини нафас сӯзон тарем
از شبان وادی ایمن نفس سوزانتریم
Мӯсои андари тавр май рақсади зи мўсиқори мо
موسی اندر طور میرقصد ز موسیقار ما
Шоҳбози хомаи мо арз парвозӣ кунад
شاهباز خامه ما عرض پروازی کند
Мурғи ҷинати рости обу дона дар минқори мо
مرغ جنت راست آب و دانه در منقار ما
Гар ба табъи зоҳидӣ талхаст таъми мо чаҳ ғам
گر به طبع زاهدان تلخ است طعم ما چه غم
Равшан аз рухсор михўорон шавад меъёри мо
روشن از رخسار میخواران شود معیار ما
Хизр вақте кӯ ? ки таъмири хароб мо кунад
خضر وقتی کو؟ که تعمیر خراب ما کند
Зон ки ганҷӣ ҳаст пинҳон дар таҳи девори мо
زان که گنجی هست پنهان در ته دیوار ما
Ҳркҷо ишқаст муставлеи табибон хаста анд
هرکجا عشق است مستولی طبیبان خستهاند
Аз кадомин дарди воҷўиди дили бемори мо
از کدامین درد واجوید دل بیمار ما
Зираконро донау оби чаман хомаш накард
زیرکان را دانه و آب چمن خامش نکرد
Андалеби маст рамзӣ донад аз асрори мо
عندلیب مست رمزی داند از اسرار ما
Чун магас бар қанд меҷӯшем бар матлӯби хеш
چون مگس بر قند میجوشیم بر مطلوب خویش
Гармии савдоӣ Юсуф нашканад бозори мо
گرمی سودای یوسف نشکند بازار ما
Хусрави назмӣ « назирӣ » нақши ширин тарҳ кун
خسرو نظمی «نظیری» نقش شیرین طرح کن
Чархи бор мо кашад чун ишқ бошад кори мо
چرخ بار ما کشد چون عشق باشد کار ما