Касе ба малики ҳудус аз қадам наме уфтад

کسی به ملک حدوث از قدم نمی‌افتد

Ки бар гузаргаи шодӣ ва ғам наме уфтад

که بر گذرگه شادی و غم نمی‌افتد

Ба равшанои дили рӯ ки рафтагони растанад

به روشنایی دل رو که رفتگان رستند

Гузори зиндаи дилон бар адам наме уфтад

گذار زنده‌دلان بر عدم نمی‌افتد

Ман ин мураққаъ алвон бияфканам рӯзӣ

من این مرقع الوان بیفکنم روزی

Ки тарҳи риндӣу тақво ба ҳам наме уфтад

که طرح رندی و تقوا به هم نمی‌افتد

Забони даъвату тасхир ба ки барбандам

زبان دعوت و تسخیر به که بربندم

Ки дар чароғи каси оташ ба дам наме уфтад

که در چراغ کس آتش به دم نمی‌افتد

Мусофирӣ ки зи нобӯд буд худ бинад

مسافری که ز نابود بود خود بیند

Ба фикри манфиат беш ва кам наме уфтад

به فکر منفعت بیش و کم نمی‌افتد

Далели ишқи нзибд касе ки дар ҳар гом

دلیل عشق نزیبد کسی که در هر گام

Сараш чу шамъ ба пеш қадам наме уфтад

سرش چو شمع به پیش قدم نمی‌افتد

Чунон зи шавқ ту гардӣда каъбаи саргардон

چنان ز شوق تو گردیده کعبه سرگردان

Ки роҳи каъбаи равон бар ҳарам наме уфтад

که راه کعبه روان بر حرم نمی‌افتد

Чунон парастиш рӯй ту ҷазби дил ҳо кард

چنان پرستش روی تو جذب دل‌ها کرد

Ки ишқи брҳмнон бар санам наме уфтад

که عشق برهمنان بر صنم نمی‌افتد

Ба зикри ман хат нисён кашидае аммо

به ذکر من خط نسیان کشیده‌ای اما

Ба фикри ғайри зи дастат қалам наме уфтад

به فکر غیر ز دستت قلم نمی‌افتد

зи саҳви хотири ёрони чунон сқим шудам

ز سهو خاطر یاران چنان سقیم شدم

Ки сояи қаламам бар рақам наме уфтад

که سایه قلمم بر رقم نمی‌افتد

Нависӣ ар ба « назирӣ » дуо вагар дашном

نویسی ار به «نظیری» دعا و گر دشنام

зи шавқи нома ба фикр рақам наме уфтад

ز شوق نامه به فکر رقم نمی‌افتد