Рашкӣ ба ман гуҳии зи адоӣ сухан расад
رشکی به من گهی ز ادای سخن رسد
Сад ҷойгаҳ мақом кунад , то ба ман расад
صد جایگه مقام کند، تا به من رسد
Ман бар дар аз таҷаллии он нури сохтам
من بر در از تجلی آن نور ساختم
Парвона чун ба арсаи он анҷуман расад
پروانه چون به عرصه آن انجمن رسد
Дар роҳи ту шимолу сабо дар тараддуданд
در راه تو شمال و صبا در ترددند
То бӯ киро диҳӣ ки ба байт алҳзн расад
تا بو که را دهی که به بیت الحزن رسد
Гар зери гулбунии қафасамро наме наҳй
گر زیر گلبنی قفسم را نمی نهی
Ҷое буна ки нола ба гӯш чаман расад
جایی بنه که ناله به گوش چمن رسد
Гуфтанд : кам бақост саман андалеб гуфт
گفتند: کم بقاست سمن عندلیب گفت
эй коши умри гул ба ҳаёт саман расад
ای کاش عمر گل به حیات سمن رسد
Ҷайбӣ ки пора шуд ба маломат руфӯ нашуд
جیبی که پاره شد به ملامت رفو نشد
Даст ҷунун мабод ба ин перҳан расад
دست جنون مباد به این پیرهن رسد
Зоҳиди зи сари нуктаи сӯфӣ чаҳ огаҳаст ?
زاهد ز سر نکته صوفی چه آگه است؟
Дар шеваҳои чашми санам брҳмн расад
در شیوه های چشم صنم برهمن رسد
Бозичаи ту мӯъҷизи исо ба бод дод
بازیچه تو معجز عیسی به باد داد
Дар наргиси ту кас ба чаҳ афсун ва фан расад ?
در نرگس تو کس به چه افسون و فن رسد؟
эй ҷон ба саъии дард « назирӣ » наме равад
ای جان به سعی درد «نظیری » نمی رود
Маргии магар ба дод дил зистан расад
مرگی مگر به داد دل زیستن رسد