Ғами гирд фироқ дид аз давр

غم گرد فراق دید از دور

Овехт дигар ба ҷони ранҷур

آویخت دگر به جان رنجور

Аз ъушрати ноқиси замона

از عشرت ناقص زمانه

Кӯтоҳи амали терми зи махмур

کوتاه عمل ترم ز مخمور

Рухсораи хуши дилӣ на байнам

رخساره خوش دلی نه بینم

Дил шуд зи фироқи чашм бе нур

دل شد ز فراق چشم بی نور

Тақсир нашуд ба гиряи пинҳон

تقصیر نشد به گریه پنهان

Дар об нашуд дафинаи мастур

در آب نشد دفینه مستور

Захми ҷигарам ки май занами ҷӯш

زخم جگرم که می زنم جوش

Кони намакӣ ки мекунӣ шӯр

کان نمکی که می کنی شور

Кӯтаҳ нашавад ба хомшии ҳарф

کوته نشود به خامشی حرف

Марҳам чаҳ кунад ба захми носур

مرهم چه کند به زخم ناسور

Онҷо ки шароб шавқ доданд

آنجا که شراب شوق دادند

Таҳи ҷуръаи з ман гирифт Мансур

ته جرعه ز من گرفت منصور

Бӯеи зи нишот мо надорад

بویی ز نشاط ما ندارد

Обу гули садҳазори фағфур

آب و گل صدهزار فغفور

Мушкили ҳолеу турфаи корӣ

مشکل حالی و طرفه کاری

Худ шоҳид ва худ нишаста маҳҷӯр

خود شاهد و خود نشسته مهجور

Кори ту ҳама ба дили мувофиқ

کار تو همه به دل موافق

Аз некуии ту чашми бади давр

از نیکویی تو چشم بد دور

Зуд аз ту ғанӣ шавад « назирӣ »

زود از تو غنی شود «نظیری »

Дарвеши якеу шаҳри маъмур

درویش یکی و شهر معمور