Сухан гуед бо ман камтари имрӯз

سخن گویید با من کمتر امروز

Ки дорам дил ба ҷои дигари имрӯз

که دارم دل به جای دیگر امروز

Чунон савдои мизоҷамро гирифта

چنان سودا مزاجم را گرفته

Ки талхам май намояди шукри имрӯз

که تلخم می نماید شکر امروز

Чунон ашкам ба хушк ватар расида

چنان اشکم به خشک و تر رسیده

Ки чӯбам менасузад озари имрӯз

که چوبم می نسوزد آذر امروز

зи баси тӯфони дарави бомами гирифта

ز بس طوفان درو بامم گرفته

Фароз бом меёбам дар имрӯз

فراز بام می یابم در امروز

Саманди ишқро зин барграфтам

سمند عشق را زین برگرفتم

Хирадро май нуҳуми ҷл бар хари имрӯз

خرد را می نهم جل بر خر امروز

Ба куфри ин санамгар дайн набозам

به کفر این صنم گر دین نبازم

Нўисндми млоики кофари имрӯз

نویسندم ملایک کافر امروز

Ду як май бохатми умрии дӯшаш ро

دو یک می باختم عمری دوشش را

Фикандам муҳраро дар шшдри имрӯз

فکندم مهره را در ششدر امروز

Дарин ъушрат ки ман ҷон ме сипорам

درین عشرت که من جان می سپارم

намегиряд ба маргами модари имрӯз

نمی گرید به مرگم مادر امروز

Ба зоҳири дидагар сӯрат парастаст

به ظاهر دیده گر صورت پرستست

Манам ҷонро ба маънии раҳбари имрӯз

منم جان را به معنی رهبر امروز

Агар даврони хиради назмам « назирӣ »

اگر دوران خرد نظمم «نظیری »

Кашад ҳасанаши қалам дар кишвари имрӯз

کشد حسنش قلم در کشور امروز