Даҳуми ду малик ба як нағмаи рубоби иваз
دهم دو ملک به یک نغمه رباب عوض
Кунам ба сояи абрии сад офтоби иваз
کنم به سایه ابری صد آفتاب عوض
зи қайди хонқҳми дили гирифта дайр куҷост ?
ز قید خانقهم دل گرفته دیر کجاست؟
Ки зуҳд ноб кунам бо шароби ноби иваз
که زهد ناب کنم با شراب ناب عوض
Сабуем аз чаҳ замзам шикаста ме ояд
سبویم از چه زمزم شکسته می آید
Ба гардани хам май афканами таноби иваз
به گردن خم می افکنم طناب عوض
Дилии зи бодияи каъбаи ташна тар дорам
دلی ز بادیه کعبه تشنه تر دارم
Рӯм ба дайр ба тӯфон кунам шароби иваз
روم به دیر به طوفان کنم شراب عوض
Тамаъ ки сар ба замин дод обрӯем ро
طمع که سر به زمین داد آبرویم را
Ба ҷӯии ҳосилами орад ба ҷуръаи оби иваз
به جوی حاصلم آرد به جرعه آب عوض
Фалак ки пардаи зи чашми ҳасуди даври андохт
فلک که پرده ز چشم حسود دور انداخت
з тоб мефиканд бар рухами ниқоби иваз
ز تاب می فکند بر رخم نقاب عوض
Иморати дили ман даври чарх барҳам зад
عمارت دل من دور چرخ برهم زد
Ки нест мояи сад ганҷи ин хароби иваз
که نیست مایه صد گنج این خراب عوض
Ба муддаои дили худ куҷои расм ? ҳайҳот
به مدعای دل خود کجا رسم؟ هیهات
Ки сад савол маро нест як ҷавоби иваз
که صد سؤال مرا نیست یک جواب عوض
Кунун дилу хирад аз хоб чашм бигушоӣанд
کنون دل و خرد از خواب چشم بگشایند
Ки рафт дидаи сўдоиим ба хоби иваз
که رفت دیده سوداییم به خواب عوض
Намонад моя « назирӣ » қаноат эксир аст
نماند مایه «نظیری » قناعت اکسیر است
Мҷуи ҷуз аз дар ҳиммат ба ҳеҷ боби иваз
مجو جز از در همت به هیچ باب عوض