Имрӯзи пешат аз ғами худ дам наме занам

امروز پیشت از غم خود دم نمی‌زنم

Фориғ нишин ки базми ту барҳам наме занам

فارغ نشین که بزم تو برهم نمی‌زنم

Андохтам ба бурдани шодии ҳазор кам

انداختم به بردن شادی هزار کم

Ғайр аз ду шаш ба бохтани ғам наме занам

غیر از دو شش به باختن غم نمی‌زنم

Нозам ба ин шараф ки ғуломи муҳаббатам

نازم به این شرف که غلام محبتم

Лофи нисбати зи нисбати одам наме занам

لاف نسبت ز نسبت آدم نمی‌زنم

Сад раҳи савори ҳамтем аз ин ва он гузашт

صد ره سوار همتم از این و آن گذشت

Бо онкии тозӣона бар адҳам наме занам

با آنکه تازیانه بر ادهم نمی‌زنم

Май созам арча дасти дағо беш ме кунад

می‌سازم ارچه دست دغا بیش می‌کند

Май бозам арча нақши вафо кам наме занам

می‌بازم ارچه نقش وفا کم نمی‌زنم

Имрӯз беҳтараст « назирӣ » ҷароҳатам

امروز بهتر است «نظیری» جراحتم

Осӯдаам ки даст ба марҳам наме занам

آسوده‌ام که دست به مرهم نمی‌زنم