Нолаи мо нағмаи аҳли наворо гарми сохт

ناله ما نغمه اهل نوا را گرم ساخت

Шавқи мо ҳангомаи ин моҷароро гарми сохт

شوق ما هنگامه این ماجرا را گرم ساخت

Зотши водии биФкндими наълин аз қадам

زآتش وادی بیفکندیم نعلین از قدم

Мӯсои мо гарм рӯ гардид ва моро гарми сохт

موسی ما گرم رو گردید و ما را گرم ساخت

Дар гирифт аз баҳри хотири гармии парвонаи мум

در گرفت از بهر خاطر گرمی پروانه موم

Шамъ маҷлис шуд ки дар кошонаи ҷоро гарми сохт

شمع مجلس شد که در کاشانه جا را گرم ساخت

Гармии ҳангомаи гулшани паии ошӯби мост

گرمی هنگامه گلشن پی آشوب ماست

Гули шкФт аз нолаи булбул ки моро гарми сохт

گل شکفت از ناله بلبل که ما را گرم ساخت

Мояи меҳру муҳаббат аз ривоҷ афтода аст

مایه مهر و محبت از رواج افتاده است

Суҳбати мо , рӯзи бозори вафоро гарми сохт

صحبت ما، روز بازار وفا را گرم ساخت

Кини хусрав гарнабӯдӣ сохтӣ Фарҳоди кор

کین خسرو گر نبودی ساختی فرهاد کار

Таънаи номӯси хуии подшоро гарми сохт

طعنه ناموس خوی پادشا را گرم ساخت

Ҳар бен мижгон ба чашми халқ қурбон карда аст

هر بن مژگان به چشم خلق قربان کرده است

Гиряи мо достони Карбалоро гарми сохт

گریه ما داستان کربلا را گرم ساخت

Эътимодӣ бар шамеми ҳала Юсуф надошт

اعتمادی بر شمیم حله یوسف نداشت

Серумаи хокистарами боди саборо гарми сохт

سرمه خاکسترم باد صبا را گرم ساخت

Шуд ба ғурбати қадари ман маълум бар аҳли ватан

شد به غربت قدر من معلوم بر اهل وطن

Гармии ҳангомаи меҳри ошноро гарми сохт

گرمی هنگامه مهر آشنا را گرم ساخت

Дидам ашФоқи рахти маҳрӯми гаштам аз лабат

دیدم اشفاق رخت محروم گشتم از لبت

Вусъати эҳсон дар истиғнои гадоро гарми сохт

وسعت احسان در استغنا گدا را گرم ساخت

Аз улувва рифъатам маълум шуд ҳасани қабул

از علو رفعتم معلوم شد حسن قبول

Чун муроди дил иҷобат шуд дуоро гарми сохт

چون مراد دل اجابت شد دعا را گرم ساخت

Ршҳ абраст ин « назирӣ » ё сабо ё атри гул

رشح ابرست این «نظیری » یا صبا یا عطر گل

Булбул аз шеъртарат савту наворо гарми сохт

بلبل از شعر ترت صوت و نوا را گرم ساخت