Назар ба зоҳиру сайёд дар хафо хуфтаст

نظر به ظاهر و صیاد در خفا خفتست

Аҷали расида чаҳ донад бало куҷо хуфтаст

اجل رسیده چه داند بلا کجا خفتست

Куҷои зи фитнаи он чашми ним боз раҳем

کجا ز فتنه آن چشم نیم باز رهیم

Ки фитнаи хостаҳ аз хобу пой мо хуфтаст

که فتنه خاسته از خواب و پای ما خفتست

Касе ба қалби шабами трктоз май орад

کسی به قلب شبم ترکتاز می آرد

Ки бар фарроши қсби пой дар ҳино хуфтаст

که بر فراش قصب پای در حنا خفتست

Шамеми меҳри зи боғ вафо наме ояд

شمیم مهر ز باغ وفا نمی آید

Ба ҳар чаман ки ту нашукуфта ӣӣ сабо хуфтаст

به هر چمن که تو نشکفته یی صبا خفتست

Табиби ишқи бабради тамаъи зи беморӣ

طبیب عشق ببرد طمع ز بیماری

Ки шаб ба роҳати азин дард бедаво хуфтаст

که شب به راحت ازین درد بی دوا خفتست

Касе аз мъонқаҳи рӯз васл ёбад завқ

کسی از معانقه روز وصل یابد ذوق

Ки чанд шаби зи ҳам оғӯши худ ҷудо хуфтаст

که چند شب ز هم آغوش خود جدا خفتست

Бигир коми дил эй къбтини мардуми чашм

بگیر کام دل ای کعبتین مردم چشم

Ки барадати омадау нақш бар қафо хуфтаст

که بردت آمده و نقش بر قفا خفتست

Шаби умед ба аз субҳ ид ме гузарад

شب امید به از صبح عید می گذرد

Ки ошно ба таманноӣ ошно хуфтаст

که آشنا به تمنای آشنا خفتست

Фасонаи сарф « назирӣ » макун ки хоб кунад

فسانه صرف «نظیری » مکن که خواب کند

Шикастае ки ба сад дард мубтало хуфтаст

شکسته‌ای که به صد درد مبتلا خفتست