Дил ба доми зулф мишкӣнаст боз
دل به دام زلف مشکین است باز
Бастаи он мӯӣ парчинаст боз
بستهٔ آن موی پرچین است باز
Ҳалқаҳои зулф дар рӯй нигор
حلقههای زلف در روی نگار
Зон дили ранҷур ғамгинаст боз
زان دل رنجور غمگین است باز
намеравад ёр ва ба ҳамроҳаши рақиб
میرود یار و به همراهش رقیب
Ёрб ӯро ин чаҳ ойинаст боз
یارب او را این چه آیین است باز