Мардӯди халқи гаштаму гаштами писанди хеш

مردود خلق گشتم و گشتم پسند خویش

Рустами зи банди ғайр ва фитодам ба банди хеш

رستم ز بند غیر و فتادم به بند خویش

То чанд дарди заҳри бкомми зҷоми ғайр

تا چند درد زهر بکامم زجام غیر

Зини пас ману мазоқи хуш аз софи қанди хеш

زین پس من و مذاق خوش از صاف قند خویش

Моро бтлхкомии худ завқ дигар аст

ما را بتلخکامی خود ذوق دیگر است

Чандини мадори поси лаби нӯшханди хеш

چندین مدار پاس لب نوشخند خویش

Тӯфони зи дидаи орму бандами лаб аз сухан

توفان ز دیده آرم و بندم لب از سخن

Танги омадами зи даъвати нои сӯдманди хеш

تنگ آمدم ز دعوت نا سودمند خویش

Дар боғи ҷаъди сунбул ва дар базми зулфи ёр

در باغ جعد سنبل و در بزم زلف یار

Ҳарҷо басӯратӣ дигар оради каманди хеш

هرجا بصورتی دگر آرد کمند خویش

Охири Аннани ишқи супурдами бадасти ақл

آخر عنان عشق سپردم بدست عقل

Ин арса Эй набӯд ки тозам саманди хеш

این عرصه ای نبود که تازم سمند خویش

Хомии зи сари буна ки бхоки аўФтии нишот

خامی ز سر بنه که بخاک اوفتی نشاط

эй мива хом бош бшохи баланди хеш

ای میوه خام باش بشاخ بلند خویش