Рафтӣ ва як нафас нарафт аз назарами хаёли ту

رفتی و یک نفس نرفت از نظرم خیالِ تو

Бе хабарами зи худ вале бо хабарами зи ҳоли ту

بی‌خبرم ز خود ولی با خبرم ز حالِ تو

Ҷон ба лаби расидаро дар қадами сабои кашам

جانِ به لب رسیده را در قدمِ صبا کشم

Гурба ман оварад шабии муждаи иттисоли ту

گربه من آورد شبی مژدۀ اتّصالِ تو

Меҳри ту бар ки афканами буии ту аз ки бишинавам

مهرِ تو بر که افکنم بوی تو از که بشنوم

Ҳам ба хаёл рӯй ту кист дигар ҳам?или ту

هم به خیالِ رویِ تو کیست دگر همالِ تو

Ёр ба ҳеҷ достон нест ба эътибори ман

یار به هیچ داستان نیست به اعتبارِ من

Сарв ба ҳеҷ бӯстон нест ба эътидоли ту

سرو به هیچ بوستان نیست به اعتدالِ تو

Ояти субҳи қудратии партави нури иззатӣ

آیتِ صبحِ قدرتی پرتوِ نورِ عزّتی

Ақл аз он намерасад дар сифати камоли ту

عقل از آن نمی‌رسد در صفتِ کمالِ تو

Айни сафои куҷои бадӣ дар дили меҳрбони ман

عینِ صفا کجا بدی در دلِ مهربان من

Гарна зи меҳри осмон файз диҳад ҷамоли ту

گرنه ز مهرِ آسمان فیض دهد جمالِ تو

Гардани сад ҳазор дили қайд ҷамол карда анд

گردن صد هزار دل قیدِ جمال کرده‌اند

Ҳалқаи доми зулфи ту донаи доми холи ту

حلقۀ دام زلفِ تو دانۀ دام خالِ تو

Ҷуз ба насими васл ту нест умеди зиндагӣ

جز به نسیمِ وصلِ تو نیست امیدِ زندگی

Восита ҳаёт шуд роиҳаи шимоли ту

واسطۀ حیات شد رایحۀ شمالِ تو

Шефтагӣ ва бехудӣ чун накунам ки ақли ман

شیفتگی و بی‌خودی چون نکنم که عقلِ من

То бичишад ҷуръа Эй нест шуд аз зулоли ту

تا بچشد جرعه‌ ای نیست شد از زلالِ تو

Бас ки ба рӯзгорҳо қиссаи ту нзорё

بس که به روزگارها قصّه تو نزاریا

Нақли сафина ҳо кунанд аз паии интиқоли ту

نقل سفینه‌ها کنند از پی انتقالِ تو