Чаро ба ҷониб ёрон намекунад назарӣ
چرا به جانبِ یاران نمیکند نظری
Ба дӯстон нанамое зи дӯстии асарӣ
به دوستان ننمایی ز دوستی اثری
Ба рқъаҳ эй чаҳ будгар маро азиз кунӣ
به رقعه ای چه بود گر مرا عزیز کنی
Агар ба расм иёдат намекунад гузарӣ
اگر به رسمِ عیادت نمیکند گذری
На муҳаррамӣ ки паёмӣ бидон тарафи орад
نه محرمی که پیامی بدان طرف آرد
На қосидӣ ки аз он ҷонибам диҳад хабарӣ
نه قاصدی که از آن جانبم دهد خبری
Заруратаст ки бо одамии сухани гуфтан
ضرورت است که با آدمی سخن گفتن
Худоӣ рост наёвард бе паёми барӣ
خدای راست نیاورد بی پیامبری
Магари ҳадиси канори ту бо сабо гӯям
مگر حدیث کنارِ تو با صبا گویم
Ки дар миён натавонам ниҳод бо дгарӣ
که در میان نتوانم نهاد با دگری
Аз он ба чашм ту додам дилӣ ба лаби ҷонӣ
از آن به چشمِ تو دادم دلی به لب جانی
Казин магари назарии бахшем аз он шукрӣ
کزین مگر نظری بخشیم از آن شکری
Қазо чаҳ дафъ наад ё қадар чаҳ манъ кунад
قضا چه دفع نهد یا قدر چه منع کند
Агар анояти ту мултафит шавад қадре
اگر عنایتِ تو ملتفت شود قدری
Ба ним ҷон чаҳ такаллуф кунад нзории зор
به نیمجان چه تکلّف کند نزاریِ زار
Валек рад накунанд аз фақири моҳзрӣ
ولیک رد نکنند از فقیر ماحضری
Ба пои мардии лутфи ту восиқами ҳоле
به پایْمردیِ لطفِ تو واثقم حالی
Вагарнаи дасти нёлўдмӣ ба мухтасарӣ
وگرنه دست نیالودمی به مختصری