Хушаст дарди ҷудоӣу доғи маҳҷӯрӣ
خوش است دردِ جداییّ و داغِ مهجوری
Агар висол муяссар шавад пас аз даврӣ
اگر وصال میسّر شود پس از دوری
Саводи малики вуҷӯдам хароб кард фироқ
سوادِ ملکِ وجودم خراب کرد فراق
Хароб карда ишқу умеди маъмурӣ
خرابکرده عشق و امیدِ معموری
Бидон умед ки рӯзӣ ба гӯш дӯст расад
بدان امید که روزی به گوشِ دوست رسد
Ба назм оварам ин ақдҳои маншурӣ
به نظم آورم این عِقدهای منشوری
зи дидаи дона дар назм мекунам ҳамаи шаб
ز دیده دانه دُر نظم میکنم همه شب
Ба равшанои дил дар шубони диҷўрӣ
به روشناییِ دل در شبانِ دیجوری
Муъофи дорнигор агар зарурати ҳол
معاف دار نگار اگر ضرورتِ حال
Шикоятии ду се анҳо кунам ба дастурӣ
شکایتی دو سه اِنها کنم به دستوری
Сломкӣ нафаристӣ паёмакӣ надиҳӣ
سلامکی نفرستی پیامکی ندهی
На шарти аҳд қадимаст агар чаҳ маъзӯрӣ
نه شرطِ عهدِ قدیم است اگر چه معذوری
Сарат ба ҳамчуи манӣ ар фурӯ наме ояд
سرت به همچو منی ار فرو نمیآید
Ғариб нест ки дар ҳасани хеши мағрурӣ
غریب نیست که در حسن خویش مغروری
Шабии зи ҷоми висоли ту гар шудам сармаст
شبی ز جام وصال تو گر شدم سرمست
Қёмто ки бидидам зи рӯзи махмурӣ
قیامتا که بدیدم ز روزِ مخموری
Пас аз муҷоҳидаи интизор хуш бошад
پس از مجاهده انتظار خوش باشد
Агар халос ба сиҳҳат буд зи ранҷурӣ
اگر خلاص به صحّت بود ز رنجوری
Нзорёи зи азоби фироқ беш манол
نزاریا ز عذابِ فراق بیش منال
Ки дар муқобил нешаст нӯши занбӯрӣ
که در مقابل نیش است نوشِ زنبوری