Агар чаҳ сӯхтаам дар балои ишқи басӣ
اگر چه سوختهام در بلای عشق بسی
Ба умри худ дили азин сон надодаам ба касе
به عمر خود دل ازین سان ندادهام به کسی
Чаҳ ҷони бикунадам то гавҳарӣ ба дасти орм
چه جان بکندم تا گوهری به دست آرم
Ки хотирам мутаъаллиқ намешавад ба хасӣ
که خاطرم متعلّق نمیشود به خسی
Ниҳони з халқ наёрам ба ҳеҷ кӯии гузашт
نهان ز خلق نیارم به هیچ کوی گذشت
Чунон ки гӯйӣ бар пой бастаам ҷарасӣ
چنان که گویی بر پای بستهام جرسی
Марои маломати мардуми дарин балои андохт
مرا ملامت مردم درین بلا انداخت
Ки аз маломати мардум бтар шудам ба басӣ
که از ملامت مردم بتر شدم به بسی
Гарм ба теғ зананд аз шукри нпрҳизм
گرم به تیغ زنند از شکر نپرهیزم
Дарин равиш натавон буд камтар аз магасӣ
درین روش نتوان بود کمتر از مگسی
Хато чаҳ гӯна тавон рафт , дар тариқати ишқ
خطا چه گونه توان رفت، در طریقت عشق
Ба рӯзи мӯҳтасибии нозир ва ба шаби асасӣ
به روز محتسبی ناظر و به شب عسسی
Дар он вуҷӯд ки султони ишқ манзил кард
در آن وجود که سلطان عشق منزل کرد
Маҷол нест ки дар сар бимонадаш ҳавасӣ
مجال نیست که در سر بماندش هوسی
Ба зӯру зар ки надорам чаҳ чора хоҳад рафт
به زور و زر که ندارم چه چاره خواهد رفت
Магар ба зории вазин беш нест дастрасӣ
مگر به زاری وزین بیش نیست دسترسی
Нзорё ба ҷафои дили буна ки натавон рафт
نزاریا به جفا دل بنه که نتوان رفت
Ба хашм аз он ки муяссар намешавад нафасӣ
به خشم از آن که میسر نمیشود نفسی