Ҳамин ки аз барам он сарви сим бар бархест
همین که از برم آن سروِ سیم بر برخاست
Ҳазор нолҳءи дилсӯзам аз ҷигар бархест
هزار نالهء دلسوزم از جگر برخاست
Даромад аз дирами иқбол чун барам бинишаст
درآمد از درم اقبال چون بَرم بنشست
Баромад аз серуми оташ чу аз назар бархест
برآمد از سرم آتش چو از نظر برخاست
На отшист ки сокин шавад ба оби серум
نه آتشیست که ساکن شود به آبِ سرم
Ки ҳар нафас ки задам шуъла бештар бархест
که هر نفس که زدم شعله بیشتر برخاست
Агар ба хона нишастаст вагар бурун омад
اگر به خانه نشستست وگر برون آمد
Ниҳону пайдо зу Фтнҳء дигар бархест
نهان و پیدا زو فتنهء دگر برخاست
Итоб гарм шуду ҷанги сахт агар бинишаст
عتاب گرم شد و جنگ سخت اگر بنشست
Қиёмат омад ва тӯфон бирафт агар бархест
قیامت آمد و طوفان برفت اگر برخاست
Барорам аз гуҳари чашм ҳар саҳари тӯфон
برآرم از گهرِ چشم هر سحر طوفان
Ки дид тӯфон каз касрат гуҳар бархест
که دید طوفان کز کثرتِ گهر برخاست
Ба ҳарза бо камараш дар миёни ниҳодами ҷон
به هرزه با کمرش در میان نهادم جان
Чу кӯҳ кун ки ҳалокаши ҳам аз камар бархест
چو کوه کن که هلاکش هم از کمر برخاست
Ҳама хилоф муродаст иқтизои қазо
همه خلافِ مرادست اقتضایِ قضا
Замона аз сари паймони мо магар бархест
زمانه از سر پیمانِ ما مگر برخاست
Ба пои мардии ақлами умедҳо будӣ
به پای مردیِ عقلم امیدها بودی
Ҳамин ки ишқ дар омад з дар ба сар бархест
همین که عشق در آمد ز در به سر برخاست
Нафаси нафас ки бар омад зи равзани ҳалқам
نفس نفس که بر آمد ز روزنِ حلقم
зи дӯди оташи дил дар ҳаво шарар бархест
ز دودِ آتشِ دل در هوا شرر برخاست
Хунаки вуҷӯди нзорӣ ки дар миёни бало
خنک وجودِ نزاری که در میانِ بلا
Нишаст эмин ва аз маъраз хатар бархест
نشست ایمن و از معرضِ خطر برخاست
Чаҳ илтифот кунад баъд аз ин зи васлу фироқ
چه التفات کند بعد از این ز وصل و فراق
Кунун ки ин ҳуҷботаши з раҳгузар бархест
کنون که این حُجباتش ز رهگذر برخاست