эй бе ту дили марои қарории не
ای بی تو دلِ مرا قراری نی
Ҳеҷам зи миёни ту канории не
هیچم ز میانِ تو کناری نی
Инсоф ки умр мекунад зойеъ
انصاف که عمر می کند ضایع
Онро ки ба даст чун ту ёрии не
آن را که به دست چون تو یاری نی
Аз васли рақиб баҳра ме ёбад
از وصلِ رقیب بهره می یابد
Моро зи ту беш интизории не
ما را ز تو بیش انتظاری نی
Гар дарёбӣ дамии дили мо ро
گر دریابی دمی دل ما را
Ҳаргиз ба аз ин сиррӣу кории не
هرگز به از این سری و کاری نی
Гар бори диҳии вагарна бар ҷонам
گر بار دهی وگرنه بر جانم
Беруни зи муҳаббати ту ёрии не
بیرون ز محبّتِ تو یاری نی
Дарёб нзорӣ ба зорӣ ро
دریاب نزاریِ به زاری را
Дар ишқи ту ҳам чу ӯ нзории не
در عشقِ تو هم چو او نزاری نی
Бал то ба киришма Эй шавад хуши дил
بل تا به کرشمه ای شود خوش دل
Аз ту ба ҳамин қадар ки оре , не
از تو به همین قدر که آری ، نی