Аз ман чаҳ шуд ки ёд наомад ҳабиб ро
از من چه شد که یاد نیامد حبیب را
Мардуми зи дард ва нест ғами ман табиб ро
مردم ز درد و نیست غم من طبیب را
Гӯ ранҷа кун қадам ба иёдат ки хуб рӯй
گو رنجه کن قدم به عیادت که خوب روی
Набӯд бадеъ агар бинавозад ғариб ро
نبود بدیع اگر بنوازد غریب را
Бростони дӯсти муҷовири бадии серум
برآستان دوست مجاور بدی سرم
Гирдаст имтиноъ набӯдӣ рақиб ро
گردست امتناع نبودی رقیب را
Ҳаргиз ба ҳарзаи домани гул кӣ диҳад зи даст
هرگز به هرزه دامن گل کی دهد ز دست
Гар ҳеҷаш ихтиёр буд андалеб ро
گر هیچش اختیار بود عندلیب را
Рағми аду чаҳ таъбия ӣӣ сохт зулфи дӯст
رغم عدو چه تعبیه یی ساخت زلف دوست
Дар ҷайби субҳи бод равон кард табиб ро
در جیب صبح باد روان کرد طبیب را
Ҷузи ёд дӯстон наравад дар мсомъм
جز یاد دوستان نرود در مسامعم
Он ба ки нашнавам ҳазёни хатиб ро
آن به که نشنوم هذیان خطیب را
Перонаи сар чу зоҳиди сунъони зи дасти дил
پیرانه سر چو زاهد صنعان ز دست دل
Дргрдни афканам ба иродати салиб ро
درگردن افکنم به ارادت صلیب را
Устоди ман муаллими китоби ишқ буд
استاد من معلم کُتّاب عشق بود
Беҳуда мекунанд маломати адиб ро
بیهوده می کنند ملامت ادیب را
Таслими ишқи шӯ чу нзорӣ на муътариз
تسلیم عشق شو چو نزاری نه معترض
Нақз муаллимон нарасад мстҷиб ро
نقض معلمان نرسد مستجیب را