Фироқи ёри гиромӣ аҷиб душвораст

فراق یار گرامی عجیب دشوارست

Алӣ алхусус касеро ки дил гирифтораст

علی‌الخصوص کسی را که دل گرفتارست

Чаҳ ихтиёр бимонад ба дасти маҷнӯн ро

چه اختیار بماند به دست مجنون را

Ки ҳасани Лайлии баси шоҳидӣ дил озораст

که حسن لیلی بس شاهدی دل آزارست

Қиёматӣ ки бидон ваъда медиҳанд алҳақ

قیامتی که بدان وعده می‌دهند، الحق

Фироқ ёр азизасту сахт душвор аст

فراق یار عزیزست و سخت دشوار است

Дар интизори мулоқоти дӯстон ба хаёл

در انتظار ملاقات دوستان به خیال

Сабур бӯдану қонеъ шудани бночорст

صبور بودن و قانع شدن به ناچارست

Дамии зоби серуми сӯз дил нашуд сокин

دمی زآب سرم سوز دل نشد ساکن

Аз онкии ноираҳ ӣ иштиёқ бисёраст

از آن‌که نایره‌ی اشتیاق بسیارست

Биноз хуфта чаҳ донад миёни наху нсиҷ

بناز خفته چه داند میان نخّ و نسیج

Ки чашми ман ҳамаи шаб то буруз бедораст

که چشم من همه شب تا به روز بیدارست

Бҳбси зулмати ғурбати чунон гирифторам

به حبسِ ظلمتِ غربت، چنان گرفتارم

Ки рӯз равшан бичишам ман шаб тораст

که روز روشن به چشم من شب تارست