Басаст мӯниси ҷонами хаёли талъати дӯст

بس است مونس جانم خیالِ طلعتِ دوست

Ки қонеъам ба хаёлаш бибин ки рух чаҳ накӯаст

که قانعم به خیالش ببین که رخ چه نکوست

Ба ҳар чаҳ дар нагарм рӯй дӯст май байнам

به هر چه در نگرم رویِ دوست می‌بینم

Магар ба дида дарунаст бал ки дида худ ӯст

مگر به دیده درون است، بل‌که دیده خود اوست

Насими дӯсти расонад ба ман сабо ҳар шаб

نسیمِ دوست رساند به من صبا هر شب

Ҳаёти ҷонам аз он хуши насим анбар бӯаст

حیاتِ جانم از آن خوش نسیمِ عنبربوست

Дилами зи шавқи ту як тост дар вафодорӣ

دلم ز شوقِ تو یک تاست در وفاداری

Валек қоматам аз меҳнати фироқ ду туаст

ولیک قامتم از محنتِ فراق دو توست

Ба гул нигаҳ накунад бози булбули ошиқ

به گل نگه نکند باز بلبلِ عاشق

зи пардагар ба дар ояд бутам чу ғунчаи зи пӯст

ز پرده گر به درآید بتم چو غنچه ز پوست

Чаро зхўии бадаш сарзаниш кунанд маро

چرا ز خویِ بدش سرزنش کنند مرا

Бутӣ бидон ҳамаи хӯбӣ чаҳ бошад ар бдхўст

بتی بدان همه خوبی چه باشد ار بدخوست

Азоби шефтагон низ маслиҳат байн аст

عذابِ شیفتگان نیز مصلحت‌بین است

Ки беғараз набӯд сарзаниши зи душману дӯст

که بی‌غرض نبود سرزنش ز دشمن و دوست

Ба ҳеҷ ваҷҳ надорам сари насиҳати халқ

به هیچ وجه ندارم سرِ نصیحتِ خلق

Маломати дили ушшоқ низ беҳдаҳ гӯаст

ملامتِ دلِ عشّاق نیز بیهُده‌گوست

зи мардумон чаҳ ҳикоят кунам ба нои воҷиб

ز مردمان چه حکایت کنم به ناواجب

Ки ҳар чаҳ бар дилу ҷон нзорӣ аст азуаст

که هر چه بر دل و جانِ نزاری است، ازوست