Дил дар хами абрӯии ту бар тоқ нишаста сет
دل در خمِ ابرویِ تو بر طاق نشسته ست
Доне ки чаро хоиФ аз он ғамза маст аст
دانی که چرا خایف از آن غمزۀ مست است
Дар пои миндози сари зулфи дили овез
در پای مینداز سرِ زلفِ دل آویز
Оҳиста ки пайкони ғамат дар дили хастаи сет
آهسته که پیکانِ غمت در دلِ خسته ست
Чун зулфи ту дар гардани мазлӯми нзорӣ
چون زلفِ تو در گردن مظلوم نزاری
Сад тавба буд каз сари зулфи ту шикастаи сет
صد توبه بود کز سرِ زلفِ تو شکسته ست
Чун чашми ту бар чашми ту шӯридау мастам
چون چشمِ تو بر چشمِ تو شوریده و مستم
Венаи мастии ман худ зи мабодӣ аласт аст
وین مستیِ من خود ز مبادیِ الست است
Бар буии қабули ?назарети масти мудомам
بر بویِ قبولِ نظرت مستِ مدامم
То чашм ту дидам ки чунон маст параст аст
تا چشمِ تو دیدم که چنان مست پرست است
Ишқ омад ва чун соъиқаи хушк ватар ман сӯхт
عشق آمد و چون صاعقه خشک و ترِ من سوخت
Афсурда чаҳ донад ки азин ҳодисаи рустаи сет
افسرده چه داند که ازین حادثه رسته ست
Хуш будаму осӯдаи бало бар серум омад
خوش بودم و آسوده بلا بر سرم آمد
Ореи зи қазои ҳеҷ дил осӯда наҷуста сет
آری ز قضا هیچ دل آسوده نجسته ست
Раҳмат кун ва ин сӯхтаи дилро зи сари лутф
رحمت کن و این سوخته دل را ز سرِ لطف
Дастӣ ба саровар агарат ҳеҷ ба даст аст
دستی به سر آور اگرت هیچ به دست است
Ҳам ту назарӣ кун ки ба бозуии нзорӣ
هم تو نظری کن که به بازویِ نزاری
Корӣ ки кушояди ҳама дар лутфи ту бастаи сет
کاری که گشاید همه در لطفِ تو بسته ست