Гар дигар бораи маро бо ту мулоқот уфтад

گر دگر باره مرا با تو ملاقات افتد

Иттифоқии аҷаб аз маҳз каромот уфтад

اتّفاقی عجب از محضِ کرامات افتد

Бо рақибони хаёлат ки нигаҳи бон ман анд

با رقیبانِ خیالت که نگه بانِ من اند

Ҳар шабам бар сари кӯии ту мақолот уфтад

هر شبم بر سرِ کویِ تو مقالات افتد

Бар ман охир чаҳ маломат ки малик дар малакӯт

بر من آخر چه ملامت که ملک در ملکوت

Дар суҷуд аз паии васлат ба муноҷот уфтад

در سجود از پیِ وصلت به مناجات افتد

Ҳиммат онаст ки аз ҷониби мо майл кунӣ

همّت آن است که از جانبِ ما میل کنی

Ҳеҷ бошад ки иродат ба сӯй мот уфтад

هیچ باشد که ارادت به سویِ مات افتد

Зоҳид онаст ки аз роҳи ҳақиқат чун ман

زاهد آن است که از راهِ حقیقت چون من

Аз сўомъ ба дар ояд ба харобот уфтад

از صوامع به در آید به خرابات افتد

Ишқ май варзи нзорӣ ки бибояд кушед

عشق می ورز نزاری که بباید کوشید

Дар муҳиммӣ ки муҳимтар з муҳимот уфтад

در مهمّی که مهمّ تر ز مهمّات افتد