Чаҳ чораи созам агар оннигор баргардад
چه چاره سازم اگر آن نگار برگردد
Ниҳон шавад зи ману ошкори баргардад
نهان شود ز من و آشکار برگردد
Ҳиҷоб кардам бо худ зи бими таъна ва лек
حجاب کردم با خود ز بیمِ طعنه و لیک
Ба таъна кӣ дилам аз ғамгусор баргардад
به طعنه کی دلم از غم گسار برگردد
Аз он ҳиҷоби намоям чу ёр мастураст
از آن حجاب نمایم چو یار مستورست
Ки чашм бад расаду рӯзгори баргардад
که چشمِ بد رسد و روزگار برگردد
Агарчӣ давлатам аз давлатаст бо ман ёр
اگرچه دولتم از دولت است با من یار
Вале мабод ки давлати зи кори баргардад
ولی مباد که دولت ز کار برگردد
Агар зёрии иқбол бар наме гирдам
اگر زیاریِ اقبال بر نمی گردم
Раво буд ки зи иқболи ёри баргардад
روا بود که ز اقبال یار برگردد
Вафо накӯаст аз он домани вафои гирам
وفا نکوست از آن دامن وفا گیرم
Ки бевафоро ёр аз канори баргардад
که بی وفا را یار از کنار برگردد
Марои зи оламён ихтиёр омад ёр
مرا ز عالمیان اختیار آمد یار
Ба ихтиёр касе зи ихтиёр бар гардад
به اختیار کسی ز اختیار بر گردد
Мақом зуҳд гирифтам чу зоҳидӣ будам
مقامِ زهد گرفتم چو زاهدی بودم
Ба зуҳду тавбаи ҳаргизи хумор бар гардад
به زهد و توبه هرگز خمار بر گردد
На зуҳд хоҳам ва мақсӯд зоҳидаст маро
نه زهد خواهم و مقصود زاهدست مرا
зи зуҳди ҳарки чу ман шуд ба ори баргардад
ز زهد هرکه چو من شد به عار برگردد
Нзорӣ аз майу маъшӯқ бар нахоҳад гашт
نزاری از می و معشوق بر نخواهد گشت
Агар муҳӣти сипеҳр аз мадори баргардад
اگر محیطِ سپهر از مدار برگردد