Фурӯғи талъат рӯй ту офтоб надорад

فروغِ طلعتِ رویِ تو آفتاب ندارد

Насими ноқаи зулфи ту машк ноб надорад

نسیمِ ناقۀ زلفِ تو مشکِ ناب ندارد

Аҷаб ки сояи зулфи ту гар расад ба ҷамодӣ

عجب که سایۀ زلفِ تو گر رسد به جمادی

Ки ҳам чу зарра ба хосият азтроб надорад

که هم چو ذرّه به خاصیّت اظطراب ندارد

Ту худ ба ҷониби мо ҳеҷ илтифоти надорӣ

تو خود به جانبِ ما هیچ التفات نداری

Марои хаёли ту як лаҳза беазоб надорад

مرا خیالِ تو یک لحظه بی عذاب ندارد

Чу ҳалқаҳои сари зулф бе қарори ту як дам

چو حلقه هایِ سرِ زلفِ بی قرارِ تو یک دم

Ду чашм жола фишонам қарор ва хоб надорад

دو چشمِ ژاله فشانم قرار و خواب ندارد

Магар ки лоиқи гӯш ту нест варна ба қимат

مگر که لایقِ گوشِ تو نیست ورنه به قیمت

Чу гавҳари садафи чашми ман саҳоб надорад

چو گوهرِ صدفِ چشمِ من سحاب ندارد

Надонам аҳли дилӣ дар билоди малики хуросон

ندانم اهلِ دلی در بلادِ ملکِ خراسان

Ки дил бар оташи ин имтиҳон кабоб надорад

که دل بر آتشِ این امتحان کباب ندارد

Касе набинам аз абнои хеши кӯ чу нзорӣ

کسی نبینم از ابنایِ خویش کو چو نزاری

Ба хӯни дили рух чун каҳрабо хизоб надорад

به خونِ دل رخِ چون کهربا خضاب ندارد

Дили шикастаи ман мушкили ин ки дар ҳамаи олам

دل شکستۀ من مشکل این که در همه عالم

Ба ҳеҷ кӯй дигар марҷаъ ва моб надорад

به هیچ کویِ دگر مرجع و مآب ندارد