Умрӣ ки марди ошиқ бедӯст ме гузорад

عمری که مردِ عاشق بی دوست می گذارد

Ҳаргиз раво набошад каз зиндагии шуморад

هرگز روا نباشد کز زندگی شمارد

Безикр ӯ ваболастгар як сухан бигӯед

بی ذکرِ او وبال است گر یک سخن بگوید

Беёд ӯ ҳаромастгар як нафаси برارد

بی یادِ او حرام است گر یک نفس برآرد

Ҳосид ба таъна гуяд каз дӯст май шикебад

حاسد به طعنه گوید کز دوست می شکیبد

Ман май рӯму лекин бахтам наме гузорад

من می روم و لیکن بختم نمی گذارد

Сангин дилон биханданд аз бе қарории мо

سنگین دلان بخندند از بی قراریِ ما

Ризвон агар бибинад рӯй ту ҳолати орад

رضوان اگر ببیند رویِ تو حالت آرد

Гар талх гуфт ширини Фарҳод май писандад

گر تلخ گفت شیرین فرهاد می پسندد

Вар заҳр мефиристад чун нӯш май гўорд

ور زهر می فرستد چون نوش می گوارد

Қозӣ чаҳ кор дорад бо эътиқоди ошиқ

قاضی چه کار دارد با اعتقادِ عاشق

Гӯ аз пас қазои рӯгар шаръ ме гузорад

گو از پسِ قضا رو گر شرع می گذارد

Дар оташи ҷудои бас мӯъҷизӣ набошад

در آتشِ جدایی بس معجزی نباشد

Бар оби чашми ошиқгар сайли хӯни баборад

بر آبِ چشمِ عاشق گر سیلِ خون ببارد

Бо он ки дар ҳузурами исбот ҷаҳл бошад

با آن که در حضورم اثبات جهل باشد

Пиндоштам ба ғайбат каз мо хабар надорад

پنداشتم به غیبت کز ما خبر ندارد

Танҳо Марви нзорӣ зеро касе бибояд

تنها مرو نزاری زیرا کسی بباید

Кӯро ба мо намояди моро бадв сипорад

کو را به ما نماید ما را بدو سپارد